दावेदारों की भीड़ से बढ़ी उलझन, संगठन-नेतृत्व की खींचतान से बिगड़ सकता है चुनावी गणित
रोहतक। सांपला नगरपालिका चुनाव को पार्टी सिंबल पर लड़ने की घोषणा करने वाली भारतीय जनता पार्टी अब अपने ही फैसले के दबाव में घिरती नजर आ रही है। टिकट के दावेदारों की लंबी कतार ने संगठन के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। हर दावेदार पूरी तैयारी के साथ मैदान में उतरने को तैयार है, ऐसे में एक को टिकट देना और बाकी को साधना पार्टी के लिए आसान नहीं दिख रहा।
जहां एक ओर कांग्रेस को गुटबाजी और कमजोर संगठन के चलते चुनावी दौड़ में पिछड़ा माना जा रहा है, वहीं सांपला में बीजेपी का अपना संगठन भी अंदरूनी खींचतान से जूझता दिखाई दे रहा है। संगठन के पदाधिकारी औपचारिक जिम्मेदारियां निभाते नजर आ रहे हैं, लेकिन बड़े नेताओं के कार्यक्रमों में उनकी सक्रिय भागीदारी न के बराबर है।
हाल ही में आयोजित “बस्ती चलो” अभियान ने इस खाई को और उजागर कर दिया। सांपला मंडल के पदाधिकारियों ने कार्यक्रम से दूरी बनाए रखी। सूत्रों के मुताबिक, न तो उन्हें कोई जिम्मेदारी सौंपी गई और न ही उनकी राय ली गई, जिससे नाराजगी खुलकर सामने आई।
स्थिति यह है कि संगठन और नेतृत्व के बीच तालमेल की कमी पार्टी की चुनावी रणनीति को कमजोर कर सकती है। अंदरूनी मतभेदों के बीच केवल संगठन के सहारे जीत हासिल करना बीजेपी के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है।
चौंकाने वाली बात यह भी है कि गढ़ी सांपला किलोई क्षेत्र के प्रभारी और नगरपालिका चुनाव की जिम्मेदारी संभाल रहे कैबिनेट मंत्री अरविंद शर्मा और रामावतार बाल्मीकि की ओर से अब तक कोई बड़ी बैठक आयोजित नहीं की गई है। कार्यकर्ताओं से संवाद की कमी ने असमंजस की स्थिति पैदा कर दी है।
विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, अरविंद शर्मा और सतीश नांदल के कार्यक्रमों में भी संगठन की उपस्थिति नगण्य रही है, जो पार्टी के भीतर बढ़ती दूरी की ओर इशारा करता है।
ऐसे हालात में यदि बीजेपी जल्द ही संगठन और नेतृत्व के बीच तालमेल नहीं बैठा पाती, तो नगरपालिका चुनाव में उसे भीतरघात और असंतोष का खामियाजा भुगतना पड़ सकता है।









