भगवान परशुराम न्याय के देवता : जयहिंद

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अपने हकों के लिए चुप रहना कायरता है : जयहिंद

युवा अपने नेताओं से सवाल करे : जयहिंद

जींद 12 अप्रैल 2026 – जयहिंद सेना प्रमुख नवीन जयहिंद जींद में 36 बिरादरी द्वारा मनाए गए भगवान परशुराम जन्मोत्सव ओर युवाओं द्वारा निकाली गई शोभा यात्रा में शामिल हुए जयहिंद ने भगवान परशुराम के स्वरूप और समाज की वर्तमान स्थिति पर बेबाकी से अपने विचार रखे

जयहिंद ने कहा कि भगवान परशुराम केवल एक जाति विशेष के नहीं, बल्कि पूरी मानवता के लिए न्याय के देवता हैं। उन्होंने अन्याय के खिलाफ शस्त्र उठाकर यह सिद्ध किया था कि धर्म की रक्षा के लिए शक्ति का प्रयोग अनिवार्य है। इसलिए भगवान परशुराम को योद्धाओं का भगवान कहा गया है

भगवान परशुराम योद्धाओं के भगवान : जयहिंद

जयहिंद ने कहा कि भगवान परशुराम शस्त्र और शास्त्र के संगम हैं। वे केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे योद्धाओं के भगवान हैं। उन्होंने ऐसे दुष्ट राजाओं का अंत करके पृथ्वी पर न्याय की स्थापना की थी। जो जनता को परेशान करते थे आज के युवाओं को भगवान परशुराम से वीरता और निडरता की प्रेरणा लेनी चाहिए। ना कि अपने स्वार्थ के लिए नेताओं की पिंडी चाटते उनके पीछे पीछे घूमते रहना चाहिए

युवा अपने नेताओं से सवाल करें : जयहिंद

जयहिंद ने युवाओं से आह्वान करते हुए कहा की आज के शिक्षित युवा अपने स्वयंभू ब्राह्मण नेताओं से सवाल करना सीखें।” उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि कई नेता समाज के नाम पर अपनी राजनीति तो चमकाते हैं, लेकिन जब समाज के युवाओं के रोजगार, शिक्षा या मान-सम्मान की बात आती है, तो वे मौन साध लेते हैं। युवाओं को पूछना चाहिए कि इन नेताओं ने समाज के उत्थान के लिए अब तक क्या ठोस कदम उठाए हैं।

अपने हकों के लिए चुप रहना कायरता है : जयहिंद

जयहिंद ने स्पष्ट किया कि भगवान परशुराम का जीवन अनुशासन और न्याय पर आधारित था। उन्होंने कभी भी निर्दोष पर हाथ नहीं उठाया, लेकिन जब-जब सत्ता मद में चूर होकर किसी ने मर्यादा लांघी, तो परशुराम का परसा (कुल्हाड़ा) न्याय करने के लिए उठा। समाज को उन्हें इसी रूप में याद रखना चाहिए।

“भगवान परशुराम ने हमें सिखाया कि चुप रहना कायरता है। अगर आपके पास शक्ति है, तो उसका उपयोग न्याय दिलाने के लिए करें। युवाओं को अब भक्ति के साथ-साथ अपने अधिकारों के प्रति शक्ति भी दिखानी होगी।”

Bharat Sarathi
Author: Bharat Sarathi

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