दीपेन्द्र हुड्डा की मांग: बच्चों के सोशल मीडिया व ऑनलाइन गेम्स उपयोग पर सख्त कानून बनें

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·        लोकसभाध्यक्ष ने सांसद दीपेन्द्र हुड्डा की सराहना करते हुए कहा कि शून्य काल में इसी तरह के मत और दृष्टिकोण आने चाहिए

·        सरकार ने आश्वासन दिया कि सांसद दीपेन्द्र हुड्डा द्वारा उठायी गई मांग पर ठोस कदम उठाएगी

·        सट्टा आधारित खेलों का फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म्स पर खुलेआम हो रहा प्रचार, जिसे नियंत्रित करने की जरूरत – दीपेन्द्र हुड्डा

·        भारत में सबसे ज्यादा डेटा इस्तेमाल हो रहा है। वहीं, अमेरिका में मेंटल हेल्थ को देखते हुए मेटागूगल जैसी कंपनियों पर फाईन लगाये जा रहे– दीपेन्द्र हुड्डा

·        अंतर्राष्ट्रीय प्रयासों और बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़े जोखिमों को देखते हुए जरूरी है कि सरकार साइबर बुलिंग, ऑनलाइन उत्पीड़न, डेटा की गोपनीयता से जुड़े गंभीर प्रश्नों पर विचार करे – दीपेन्द्र हुड्डा

चंडीगढ़, 27 मार्च। सांसद दीपेन्द्र हुड्डा ने आज लोकसभा में देश भर में छोटे बच्चों और किशोरों द्वारा स्मार्ट फोन के माध्यम से सोशल मीडिया, ऑनलाइन गेम्स के बढ़ते और अनियंत्रित स्क्रीन टाइम से होने वाले दुष्प्रभाव का महत्त्वपूर्ण मुद्दा उठाते हुए मांग करी कि इस पर अंकुश के लिए भारत में उचित कायदे-कानून बनाये जाएँ। क्योंकि आज भारत में सबसे ज्यादा डेटा का इस्तेमाल हो रहा है। वहीं, अमेरिका में मेंटल हेल्थ को देखते हुए मेटा, गूगल जैसी कंपनियों पर फाईन लगाये जा रहे हैं। उल्लेखनीय है कि संसद में पहली बार किसी सांसद ने आम जनहित से जुड़े इतने महत्त्वपूर्ण मुद्दे को उठाया, जिसकी खुद लोकसभाध्यक्ष ने भी सदन में सराहना की और कहा कि शून्य काल में इसी तरह के मत और दृष्टिकोण आने चाहिए। सरकार ने आश्वासन दिया कि सांसद दीपेन्द्र हुड्डा की इस मांग पर ठोस कदम उठाएगी।  

सांसद दीपेन्द्र हुड्डा ने कहा कि आज स्थिति यह है कि बच्चे घंटों तक रील्स, वीडियो और लगातार स्क्रॉलिंग में लगे रहते हैं। इस प्रवृत्ति के कारण बच्चों और किशोरों में कम उम्र में ही मोबाइल की लत विकसित हो रही है, जो उनके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए अत्यंत गंभीर खतरा है। जिसके चलते नींद की कमी, चिंता, अवसाद और ध्यान केंद्रित करने, सुनने की क्षमता में गिरावट जैसी समस्याएँ बढ़ रही हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि किशोर उम्र के युवाओं में “एविएटर” जैसे ऑनलाइन सट्टा आधारित बेटिंग गेम्स में वर्चुअल विमान के उड़ान भरने के साथ पैसे बढ़ने का लालच दिया जाता है, जो युवाओं में गंभीर मानसिक असंतुलन पैदा कर रहे हैं। ऐसे खेल जुए की आदत को बढ़ावा देते हैं, जिससे भारी आर्थिक नुकसान, तनाव, लत और अपराधों में वृद्धि हो रही है। चिंताजनक बात यह है कि अब लूडो जैसे साधारण खेलों में भी बेटिंग सामान्य होती जा रही है। ये सट्टा आधारित खेल फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म्स पर खुलेआम प्रचारित किए जा रहे हैं, जबकि इन्हें नियंत्रित किये जाने की जरूरत है।

दीपेन्द्र हुड्डा ने कहा कि साइबर बुलिंग, ऑनलाइन उत्पीड़न, डेटा की गोपनीयता से जुड़े कई गंभीर प्रश्न हैं। विश्व स्तर पर कई देशों ने इस खतरे को गंभीरता से समझते हुए सख्त दिशा-निर्देश बनाये हैं। ऑस्ट्रेलिया ने 16 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर प्रतिबंध लगाया है और प्लेटफॉर्म्स पर ही जिम्मेदारी डाली गई है कि वे उम्र को वेरीफाई करें। वहीं फ्रांस में 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए बैन किया गया है। चीन में सरकार की गाइड लाइन है कि हर दिन एक से दो घंटे से ज्यादा का स्क्रीनटाइम नहीं हो सकता। अमेरिका में कुछ राज्यों ने रात्रिकालीन प्रतिबंध लागू किये हैं। दीपेन्द्र हुड्डा ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय प्रयासों और बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़े जोखिमों को देखते हुए, यह आवश्यक है कि सरकार देश में सोशल मीडिया के आयु-उपयुक्त उपयोग को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर उपयुक्त कानून बनाए। इसमें सुरक्षा मानक, आयु सत्यापन की व्यवस्था और बच्चों में प्रारंभिक मोबाइल लत को रोकने के लिए आवश्यक सीमाएँ तय की जाए।

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Author: Bharat Sarathi

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