हर प्रोजेक्ट पर सूचना बोर्ड क्यों नहीं? क्या छुपा रही है व्यवस्था: गुरिंदरजीत सिंह

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₹1571 करोड़ खर्च, ₹1875 करोड़ नया बजट—फिर भी सफाई गायब, बंधवाड़ी में कूड़े के पहाड़

गुरुग्राम। शहर के समाजसेवी इंजीनियर गुरिंदरजीत सिंह (अर्जुन नगर) ने गुरुग्राम में चल रहे विकास कार्यों और भारी-भरकम बजट के बावजूद जमीनी स्तर पर बदहाल हालात को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2025-26 में ₹1571 करोड़ का बजट पास हुआ था और अब 2026-27 के लिए ₹1875 करोड़ का बजट प्रस्तावित है, लेकिन इसके बावजूद सड़क, सीवर, सफाई और स्ट्रीट लाइट जैसी मूलभूत सुविधाएं चरमराई हुई हैं।

पारदर्शिता का अभाव—जनता से छिपाई जा रही जानकारी?

गुरिंदरजीत सिंह ने आरोप लगाया कि सबसे बड़ी समस्या पारदर्शिता की कमी है। शहर में करोड़ों रुपये के प्रोजेक्ट चल रहे हैं, लेकिन अधिकांश स्थानों पर प्रोजेक्ट इंफॉर्मेशन (प्राक्कलन) बोर्ड तक नहीं लगाए गए हैं। इससे जनता को यह तक नहीं पता चलता कि प्रोजेक्ट की लागत कितनी है, ठेकेदार कौन है, कार्य की समय-सीमा क्या है और जिम्मेदार अधिकारी कौन हैं।

उन्होंने कहा, “यदि हर प्रोजेक्ट साइट पर अनिवार्य रूप से सूचना बोर्ड लगाए जाएं, तो आम जनता स्वयं निगरानी कर सकती है और भ्रष्टाचार पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकता है।”

अधूरे प्रोजेक्ट और बंद सुविधाएं—जिम्मेदार कौन?

उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि कई प्रोजेक्ट शुरू तो होते हैं, लेकिन बीच में ही रुक जाते हैं या वर्षों तक अधूरे पड़े रहते हैं। सदर बाजार की मल्टीलेवल पार्किंग और अर्जुन नगर (ओम स्वीट के सामने) बना मल्टीपरपज हॉल तैयार होने के बावजूद अभी तक जनता के लिए नहीं खोले गए हैं।

सफाई व्यवस्था बदहाल—कई इलाकों में हालात गंभीर

सफाई व्यवस्था पर नाराजगी जताते हुए उन्होंने कहा कि शहर में जगह-जगह कूड़े के ढेर लगे हैं, सीवर जाम हैं और सड़कों की हालत बेहद खराब है। बसई रोड, अर्जुन नगर, मदनपुरी और प्रतापनगर जैसे इलाकों में सड़कें टूटी पड़ी हैं, जबकि मुख्यमंत्री द्वारा कई बार मरम्मत के आदेश दिए जा चुके हैं, इसके बावजूद हालात जस के तस हैं।

एक मशीन, कई उद्घाटन—करोड़ों की बर्बादी का आरोप

गुरिंदरजीत सिंह ने उदाहरण देते हुए बताया कि सफाई के लिए लाई गई जटायु मशीन का एक बार नहीं, बल्कि तीन-तीन बार अलग-अलग जनप्रतिनिधियों—गुरुग्राम विधायक मुकेश शर्मा, मेयर श्रीमती राज रानी मल्होत्रा और एमसीजी अधिकारियों—द्वारा उद्घाटन किया गया। बावजूद इसके, आज वह मशीन उपयोग में नहीं है और निगम कार्यालय में धूल खा रही है। उन्होंने इसे सरकारी धन की बर्बादी और संभावित भ्रष्टाचार का संकेत बताया।

‘जगमग गुरुग्राम’ योजना भी ठप—सुरक्षा पर असर

उन्होंने “जगमग गुरुग्राम” योजना पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि स्ट्रीट लाइट्स का काम ठप पड़ा है, जिससे कॉलोनियों की सुरक्षा प्रभावित हो रही है। वहीं मेट्रो और अन्य बड़े प्रोजेक्ट फाइलों में ही अटके हुए हैं और जनप्रतिनिधि इस मुद्दे पर चुप्पी साधे हुए हैं।

बजट बनाम जमीनी सच्चाई—पैसा कहां जा रहा है?

उन्होंने कहा कि यदि पिछले वर्ष के बजट को प्रतिदिन के हिसाब से देखा जाए, तो करोड़ों रुपये प्रतिदिन खर्च होते हैं, लेकिन जमीन पर उसका कोई प्रभाव दिखाई नहीं देता। “एक साल बीत जाने के बाद भी हालात नहीं सुधरे, तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि पैसा आखिर कहां खर्च हो रहा है?” उन्होंने कहा।

जनप्रतिनिधियों पर भी सवाल—छवि पर पड़ रहा असर

उन्होंने आरोप लगाया कि पार्षद चुनाव के समय प्रधानमंत्री की ईमानदार छवि के नाम पर वोट मांगते हैं, लेकिन चुने जाने के बाद प्रोजेक्ट की जानकारी साझा नहीं करते, देरी करते हैं और प्राक्कलन बोर्ड नहीं लगवाते। इससे जनता में भ्रष्टाचार की आशंका बढ़ती है और साथ ही प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री की छवि भी प्रभावित होती है।

प्रमुख मांगें
  • हर प्रोजेक्ट पर प्रोजेक्ट इंफॉर्मेशन (प्राक्कलन) बोर्ड लगाना अनिवार्य किया जाए
  • सड़क, सीवर, सफाई और लाइट प्रोजेक्ट की सार्वजनिक रिपोर्ट जारी की जाए
  • ठेकेदारों और अधिकारियों की जवाबदेही तय कर सख्त कार्रवाई की जाए
  • जनप्रतिनिधि और अधिकारी प्रेस के सामने आकर जवाब दें
15 दिन में सुधार नहीं तो आंदोलन और RTI अभियान

अंत में गुरिंदरजीत सिंह ने चेतावनी दी कि यदि 15 दिनों के भीतर हालात में सुधार नहीं हुआ, तो वे जन आंदोलन और आरटीआई अभियान शुरू करेंगे। उन्होंने कहा कि गुरुग्राम की जनता अब और इंतजार नहीं कर सकती और पारदर्शिता ही भ्रष्टाचार रोकने का सबसे प्रभावी माध्यम है।

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Author: Bharat Sarathi

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