गैस संकट और महंगाई पर सरकार के दावों की खुल रही पोल: विद्रोही

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अहीरवाल-एनसीआर में गैस की कमी से बढ़े खाने-पीने के दाम, किसानों के लिए खाद संकट की भी जताई आशंका

रेवाडी, 26 मार्च 2026 – स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने आरोप लगाया है कि गैस, पेट्रोल और डीजल की उपलब्धता को लेकर केंद्र की मोदी-भाजपा सरकार के दावे जमीनी स्तर पर गलत साबित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि गैस की कमी अब साफ तौर पर दिखाई देने लगी है और इसके दुष्परिणाम महंगाई के रूप में आम लोगों को झेलने पड़ रहे हैं।

विद्रोही के अनुसार अहीरवाल-एनसीआर सहित पूरे हरियाणा में गैस की कमी का सीधा असर रेहड़ी, ढाबों और होटलों पर पड़ा है, जिससे चाय और अन्य खाद्य पदार्थों के दाम बढ़ गए हैं। उन्होंने बताया कि खानपान का खर्च 25 से 30 प्रतिशत तक बढ़ चुका है और यदि हालात ऐसे ही बने रहे तो यह बढ़ोतरी 50 से 100 प्रतिशत तक पहुंच सकती है।

उन्होंने कहा कि कमर्शियल गैस सिलेंडर की कमी के कारण रेहड़ी, ढाबा और होटल संचालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मजबूरी में घरेलू गैस सिलेंडरों का उपयोग किया जा रहा है, जिससे घरेलू गैस की उपलब्धता पर भी दबाव बढ़ गया है और आम उपभोक्ताओं के लिए गैस पाना और कठिन हो गया है।

विद्रोही ने यह भी दावा किया कि गैस और डीजल आधारित कामकाज प्रभावित होने से कई लोगों का रोजगार छिन रहा है, जबकि प्रवासी मजदूर अपने-अपने राज्यों में लौटने को मजबूर हो रहे हैं।

खाद संकट को लेकर उन्होंने सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार भले ही खरीफ फसल की बुवाई के लिए खाद की पर्याप्त उपलब्धता का दावा कर रही हो, लेकिन बीते 7-8 वर्षों में अहीरवाल और हरियाणा के किसानों को डीएपी और यूरिया समय पर नहीं मिल पाया। किसानों को अक्सर ब्लैक में खाद खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ा है।

उन्होंने आशंका जताई कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, विशेष रूप से ईरान-इजरायल-अमेरिका तनाव के कारण पेट्रोलियम पदार्थों का संकट और गहरा सकता है। ऐसे में सरकार किसानों को पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध कराने में कैसे सफल होगी, यह बड़ा सवाल है।

विद्रोही ने कहा कि आने वाले समय में इस संकट का सबसे अधिक असर किसान, मजदूर और आम जनता पर पड़ेगा।

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Author: Bharat Sarathi

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