27-28 मार्च को भव्य “सहस्त्र गीता कंठनाद महायज्ञ”, 11 देशों और 22 राज्यों के 1000 से अधिक साधक होंगे शामिल

कुरुक्षेत्र, 24 मार्च (प्रमोद कौशिक/संजीव कुमारी): धर्मक्षेत्र कुरुक्षेत्र एक बार फिर उस दिव्य क्षण का साक्षी बनने जा रहा है, जिसने युगों-युगों से मानवता को दिशा दी है। गीता परिवार के स्थापना के 40 स्वर्णिम वर्षों के उपलक्ष्य में 27 एवं 28 मार्च को “सहस्त्र गीता कंठनाद – राष्ट्र जागरण महायज्ञ” का भव्य आयोजन किया जाएगा।
प्रेस वार्ता में कार्यक्रम की विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए अंतरराष्ट्रीय कार्याध्यक्ष डॉ. आशु गोयल ने बताया कि यह आयोजन आध्यात्मिक चेतना और सांस्कृतिक एकता का अद्वितीय संगम होगा। कार्यक्रम में गीता परिवार के संस्थापक अध्यक्ष एवं श्री रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि महाराज के सान्निध्य के साथ राष्ट्रीय कार्याध्यक्ष डॉ. संजय मालपाणी के मार्गदर्शन का विशेष योगदान रहेगा।
प्रमुख आकर्षण
- ब्रह्मसरोवर तट पर 1000 से अधिक गीताव्रती साधकों द्वारा सामूहिक गीता कंठनाद
- विश्व के 11 देशों और भारत के 22 राज्यों की सहभागिता
- राष्ट्रव्यापी गीता ओलंपियाड विजेताओं का सम्मान
- योग ऋषि स्वामी रामदेव की विशेष उपस्थिति
- सांस्कृतिक महाशोभायात्रा एवं “गीता शंखनाद यात्रा”
ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बनेगा ब्रह्मसरोवर
27 मार्च को ब्रह्मसरोवर के पावन तट पर जब 1000 से अधिक साधक एक स्वर में श्रीमद्भगवद्गीता के 18 अध्यायों का कंठनाद करेंगे, तब यह दृश्य आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्वितीय उत्सव होगा।
कार्यक्रम शेड्यूल
27 मार्च 2026
- 02:30–05:30 सायं: संगीतमय गीता पारायण (ब्रह्मसरोवर)
- 05:45–08:00 सायं: श्रीराम प्राकट्योत्सव एवं फूलों की होली
28 मार्च 2026
- 08:00–10:30 प्रातः: गीता शंखनाद यात्रा (कुरुक्षेत्र नगर)
- 04:00–07:00 सायं: मुख्य कार्यक्रम – सहस्त्र गीता कंठनाद (पंजाबी धर्मशाला)
“लर्नगीता” बना वैश्विक अभियान
कार्यक्रम से जुड़ा “लर्नगीता” अभियान आज विश्व का सबसे बड़ा निःशुल्क ऑनलाइन गीता अध्ययन मंच बन चुका है, जिसमें 182 देशों के 15 लाख से अधिक साधक जुड़े हैं। इस महायज्ञ में लगभग 1500 प्रतिभागियों के शामिल होने की संभावना है।
सांस्कृतिक एकता का संदेश
भव्य गीता शंखनाद यात्रा में देश के विभिन्न राज्यों से आए साधक अपनी पारंपरिक वेशभूषा, लोक संगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ भाग लेंगे, जो “विविधता में एकता” का जीवंत उदाहरण प्रस्तुत करेगा।
सहस्त्र गीता कंठनाद क्या है?
यह एक ऐसा अद्वितीय आयोजन है, जिसमें सैकड़ों साधक एक साथ श्रीमद्भगवद्गीता के सभी 18 अध्यायों का कंठस्थ पाठ करते हैं, जिससे सामूहिक आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होता है।
यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र बनेगा, बल्कि सांस्कृतिक राष्ट्रचेतना और आध्यात्मिक जागरण का भी सशक्त माध्यम सिद्ध होगा।








