प्रधानमंत्री के भाषण पर उठे सवाल, देश को चाहिए स्पष्ट रणनीति: सैलजा

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-ऊर्जा संकट और अंतरराष्ट्रीय हालात पर सरकार की चुप्पी चिंताजनक

-देश यह जानना चाहता है कि हमारे पास ऊर्जा संसाधनों का कितना भंडार उपलब्ध है

चंडीगढ़/नई दिल्ली, 24 मार्च। सिरसा की सांसद, पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की महासचिव कुमारी सैलजा ने प्रधानमंत्री के भाषण पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि देश इस समय एक गंभीर अंतरराष्ट्रीय संकट से गुजर रहा है, ऐसे में सरकार से ठोस और स्पष्ट रणनीति की अपेक्षा थी, लेकिन लंबे भाषण के बावजूद आम जनता से जुड़े महत्वपूर्ण सवालों के जवाब नहीं मिल पाए। उन्होंने कहा कि देश यह जानना चाहता है कि हमारे पास ऊर्जा संसाधनों का कितना भंडार उपलब्ध है और वह कितने दिनों तक चलेगा। सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए था कि रणनीतिक रिजर्व की स्थिति क्या है और भविष्य में आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए किन देशों के साथ क्या बातचीत चल रही है। इस तरह की पारदर्शिता से ही जनता में विश्वास पैदा होता है।

कुमारी सैलजा ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विशेषकर अमेरिका के साथ भारत के संबंधों और संभावित समझौतों पर भी सरकार को स्पष्ट रुख रखना चाहिए था। रूस से तेल आयात जारी रहेगा या नहीं, अमेरिका की ओर से दी गई किसी छूट की अवधि क्या है और आगे उसकी क्या दिशा होगी, इन सभी मुद्दों पर सरकार की चुप्पी चिंता बढ़ाने वाली है। उन्होंने कहा कि देश के कई हिस्सों में लंबी कतारें और आपूर्ति को लेकर असमंजस की स्थिति बन रही है, जिससे आम जनता में असुरक्षा की भावना बढ़ रही है। ऐसे समय में सरकार का दायित्व है कि वह स्पष्ट जानकारी देकर लोगों को भरोसा दिलाए कि देश इस संकट से निपटने के लिए पूरी तरह सक्षम है।

कुमारी सैलजा ने अंत में कहा कि केवल पुरानी नीतियों का उल्लेख करना पर्याप्त नहीं है। देश को इस समय एक नई, प्रभावी और दूरदर्शी कार्ययोजना की आवश्यकता है, ताकि वर्तमान संकट से राहत मिल सके और भविष्य के लिए मजबूत आधार तैयार किया जा सके।

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Author: Bharat Sarathi

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