सीएम नायब सिंह सैनी को गुरुग्राम से चुनाव लड़ाने के आग्रह पर उठाए सवाल, कहा—स्थानीय नेतृत्व की अनदेखी से नहीं मिटेगी क्षेत्र की टीस
रेवाडी/गुरुग्राम, 24 मार्च 2026: स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने अहीरवाल के राजनीतिक नेतृत्व पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि क्षेत्र के नेता रीढ़विहीन होकर निजी स्वार्थों के चलते चापलूसी की राजनीति कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इससे अहीरवाल का स्वाभिमान लगातार कमजोर हुआ है।
विद्रोही ने अपने बयान में कहा कि इसका ताजा उदाहरण गुरुग्राम में आयोजित मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की राजनीतिक सभा में देखने को मिला, जहां हरियाणा सरकार के मंत्री राव नरबीर सिंह ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि वे अगला विधानसभा चुनाव गुरुग्राम से लड़ें और फिर से मुख्यमंत्री बनें, ताकि अहीरवाल से मुख्यमंत्री न बनने की टीस खत्म हो सके।
उन्होंने इस पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि नारायणगढ़ (अंबाला) का कोई नेता गुरुग्राम से चुनाव लड़कर मुख्यमंत्री बन भी जाता है, तो इससे अहीरवाल की जनता की वह भावना कैसे समाप्त होगी कि उनके क्षेत्र का अपना नेता मुख्यमंत्री बने।
विद्रोही ने कहा कि चाहे भूपेंद्र सिंह हुड्डा, मनोहर लाल खट्टर या नायब सिंह सैनी मुख्यमंत्री रहे हों, वे पूरे हरियाणा के मुख्यमंत्री होते हैं, लेकिन हर क्षेत्र की स्वाभाविक इच्छा होती है कि उनके अपने क्षेत्र का व्यक्ति इस पद पर पहुंचे। इसमें कोई गलत बात नहीं है।
उन्होंने कहा कि केवल किसी दूसरे क्षेत्र का व्यक्ति अहीरवाल से विधायक बन जाए, तो वह तकनीकी रूप से उस क्षेत्र का प्रतिनिधि हो सकता है, लेकिन सामाजिक और जनभावनाओं के आधार पर उसे उस क्षेत्र का मुख्यमंत्री नहीं माना जाता।
राव बिरेन्द्र सिंह के बाद 59 वर्षों से अहीरवाल से कोई मुख्यमंत्री नहीं
क्षेत्र के नेताओं पर निजी स्वार्थ और चापलूसी का आरोप
स्थानीय नेतृत्व को आगे बढ़ाने की मांग तेज
विद्रोही ने कहा कि जब तक अहीरवाल की 36 बिरादरी से कोई नेता मुख्यमंत्री नहीं बनेगा, तब तक जनता यह नहीं मानेगी कि उनके क्षेत्र का प्रतिनिधित्व शीर्ष स्तर पर हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि क्षेत्र के नेता कभी एकजुट नहीं हुए और हमेशा सत्ता के साथ खड़े होकर अपने निजी हित साधते रहे हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि जब तक अहीरवाल के लोग एकजुट होकर स्वाभिमानी नेतृत्व को आगे नहीं बढ़ाएंगे और निजी हितों से ऊपर उठकर क्षेत्रहित को प्राथमिकता नहीं देंगे, तब तक न तो यहां का कोई नेता मुख्यमंत्री बन पाएगा और न ही क्षेत्र को विकास कार्यों में उचित भागीदारी मिल सकेगी।








