स्वच्छ भारत अभियान पर लगा सवाल, गुरुग्राम में गंदगी का अंबार — गुरिंदरजीत सिंह
100 दिन में सफाई के वादे फेल, सेक्टर-37 में हालात बद से बदतर — गुरिंदरजीत सिंह
करोड़ों के बजट के बावजूद सफाई नदारद, आखिर जिम्मेदार कौन? — गुरिंदरजीत सिंह
गुरुग्राम : देश की राजधानी नई दिल्ली से सटे आधुनिक शहर गुरुग्राम के सेक्टर-37 में फैली गंदगी ने शहर की सफाई व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। क्षेत्र की गलियों में जगह-जगह लगे कूड़े के ढेरों के कारण लोगों का निकलना मुश्किल हो गया है, जिससे आम जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
अर्जुन नगर के समाजसेवी इंजीनियर गुरिंदरजीत सिंह ने इस मुद्दे पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी का “स्वच्छ भारत अभियान” का सपना आखिर गुरुग्राम में क्यों पूरा नहीं हो रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब सफाई के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, तो जमीनी स्तर पर इसका कोई असर क्यों दिखाई नहीं दे रहा।
उन्होंने कहा कि स्थानीय पार्षद आखिर कर क्या रहे हैं? क्षेत्र की सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई है और जिम्मेदार अधिकारी व जनप्रतिनिधि मूक दर्शक बने हुए हैं। सेक्टर-37 की गलियों में कूड़े के ढेर इस कदर बढ़ गए हैं कि लोगों का आवागमन तक प्रभावित हो रहा है।
गुरिंदरजीत सिंह ने विधायक द्वारा किए गए वादों पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि कहा गया था कि 100 दिनों में गुरुग्राम को साफ और स्वच्छ बना दिया जाएगा, लेकिन आज हकीकत इसके बिल्कुल विपरीत नजर आ रही है। उन्होंने पूछा कि आखिर वो वादे कहां गए और उनकी जवाबदेही कौन लेगा।
उन्होंने 22 मार्च 2026 को हुई महा रैली का जिक्र करते हुए कहा कि उस दौरान कई घोषणाएं की गईं, लेकिन सेक्टर-37 की सफाई व्यवस्था आज भी बदहाल है। बार-बार टेंडर निकाले जा रहे हैं, करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, इसके बावजूद हालात जस के तस बने हुए हैं।
उन्होंने कहा किगंदगी के कारण मच्छरों का प्रकोप बढ़ रहा है, जिससे बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है। वहीं सड़कों पर फैले कूड़े के ढेर यातायात में भी बाधा बन रहे हैं और क्षेत्र की छवि को खराब कर रहे हैं।
गुरिंदरजीत सिंह ने नगर निगम से मांग की है कि सेक्टर-37 में लगे कूड़े के ढेरों को तुरंत प्रभाव से हटाया जाए और सफाई व्यवस्था को दुरुस्त किया जाए। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह समस्या बड़े जनस्वास्थ्य संकट का रूप ले सकती है।
अब बड़ा सवाल यह है कि गुरुग्राम स्वच्छता में नंबर वन कैसे बनेगा, जब शहर के प्रमुख सेक्टर ही गंदगी से जूझ रहे हैं। क्या नगर निगम और जनप्रतिनिधि जागेंगे, या स्वच्छता के दावे केवल कागजों तक ही सीमित रहेंगे?







