-विदेश नीति में कमजोर पड़ती पकड़, देश की साख पर असर
-महंगाई, बेरोजगारी और मुद्रा का अवमूल्यन आम जनता की कमर तोड़ रहा है
-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्पन्न एलपीजी संकट जैसे मुद्दों ने भारत की कूटनीतिक स्थिति को चुनौती दी है
चंडीगढ़, 23 मार्च। सिरसा की सांसद, पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की महासचिव कुमारी सैलजा ने देश की वर्तमान आर्थिक और कूटनीतिक परिस्थितियों पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज भारत कई मोर्चों पर चुनौतियों का सामना कर रहा है। रुपये की गिरती स्थिति केवल एक आर्थिक आंकड़ा नहीं, बल्कि यह केंद्र सरकार की नीतियों, निर्णय क्षमता और वैश्विक साख पर प्रश्नचिह्न खड़ा करती है।
कुमारी सैलजा ने कहा कि भाजपा सरकार बार-बार आर्थिक मजबूती के दावे करती रही है, लेकिन वास्तविकता यह है कि महंगाई, बेरोजगारी और मुद्रा का अवमूल्यन आम जनता की कमर तोड़ रहा है। रुपये की कमजोरी यह दर्शाती है कि सरकार आर्थिक प्रबंधन में संतुलन और दूरदर्शिता बनाए रखने में असफल रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस की आर्थिक नीति हमेशा संतुलन, समावेशी विकास और जनहित पर आधारित रही है। कांग्रेस मानती है कि अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए छोटे व्यापारियों, किसानों और मध्यम वर्ग को सशक्त करना आवश्यक है। केवल बड़े उद्योगों पर केंद्रित नीतियां देश की आर्थिक नींव को कमजोर करती हैं।
विदेश नीति के संदर्भ में कुमारी सैलजा ने कहा कि हाल ही में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्पन्न एलपीजी संकट जैसे मुद्दों ने भारत की कूटनीतिक स्थिति को चुनौती दी है। पहले भारत की पहचान एक मजबूत और संतुलित वैश्विक नेतृत्व की थी, लेकिन वर्तमान में कई देशों के साथ संबंधों में स्पष्टता और स्थिरता की कमी देखने को मिल रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की विदेश नीति हमेशा संवाद, संतुलन और राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा पर आधारित रही है। भारत को वैश्विक मंच पर एक भरोसेमंद और स्थिर साझेदार के रूप में स्थापित करना आवश्यक है, न कि केवल आक्रामक बयानबाजी तक सीमित रहना चाहिए। कुमारी सैलजा ने अंत में कहा कि देश को ऐसी नीतियों की आवश्यकता है जो आर्थिक स्थिरता, सामाजिक न्याय और मजबूत अंतरराष्ट्रीय संबंधों को सुनिश्चित करें। कांग्रेस पार्टी हमेशा रचनात्मक सुझावों और जनहित के मुद्दों पर सरकार का मार्गदर्शन करती रहेगी। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि वह देशहित में ठोस और व्यावहारिक कदम उठाए, ताकि भारत की आर्थिक स्थिति और वैश्विक साख को पुन: मजबूत किया जा सके।








