गुरुग्राम में शहीदी दिवस पर उमड़ा जनसैलाब, भगत सिंह-राजगुरु-सुखदेव को दी भावभीनी श्रद्धांजलि

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AIDYO के बैनर तले मशाल जुलूस और सभा का आयोजन, महंगाई-बेरोजगारी व सामाजिक असमानता के खिलाफ उठी आवाज

गुरुग्राम, 23 मार्च 2026: शहीद-ए-आजम भगत सिंह, राजगुरु एवं सुखदेव के 95वें शहादत दिवस पर गुरुग्राम में ऑल इंडिया डेमोक्रेटिक यूथ ऑर्गेनाइजेशन (AIDYO) द्वारा प्रकाश पुरी चौक, सेक्टर-4 में एक यादगार श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाओं, पुरुषों, युवाओं और बच्चों ने भाग लेकर देश के महान क्रांतिकारियों को नमन किया।

इससे पूर्व 22 मार्च को शहीदी दिवस की पूर्व संध्या पर AIDYO और ऑल इंडिया महिला सांस्कृतिक संगठन के संयुक्त तत्वावधान में लक्ष्मण विहार फेस-2 स्थित कीर्ति मॉन्टेसरी स्कूल से मशाल जुलूस निकाला गया। यह जुलूस काली माता मंदिर और शनि मंदिर होते हुए पुनः प्रारंभिक स्थल पर पहुंचकर संपन्न हुआ। जुलूस से पहले आयोजित सभा का संचालन संगठन के उपाध्यक्ष वजीर सिंह ने किया।

सभा को संबोधित करते हुए प्रांतीय संयोजक बलवान सिंह और जिला नेता राजेश कुमार ने भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव के जीवन, संघर्ष और विचारों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि इन महान क्रांतिकारियों का संघर्ष केवल अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ नहीं था, बल्कि एक शोषणमुक्त और समानता आधारित समाज की स्थापना के लिए था।

प्रकाश पुरी चौक पर आयोजित मुख्य कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने शहीदों के चित्रों पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। इस दौरान “शहीद भगत सिंह अमर रहें” और “राजगुरु-सुखदेव अमर रहें” जैसे नारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा।

मशाल जुलूस के दौरान प्रतिभागियों ने महंगाई, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, महिलाओं और बच्चों पर बढ़ते अपराध, नशाखोरी और अश्लीलता के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। साथ ही रोजगार को मौलिक अधिकार घोषित करने, शिक्षा में वैज्ञानिक और जनवादी मूल्यों को बढ़ावा देने तथा सामाजिक असमानताओं को समाप्त करने की मांग उठाई गई।

कार्यक्रम में शामिल लोगों के चेहरों पर जहां शहीदों के प्रति गहरा सम्मान झलक रहा था, वहीं वर्तमान समस्याओं को लेकर आक्रोश भी स्पष्ट दिखाई दिया। आसपास के क्षेत्रों से भी लोग अपने घरों से निकलकर श्रद्धांजलि देने पहुंचे।

इस अवसर पर सविता, प्रियंका, वनिता, सुखदेवी, कृष्णा, सुनीता, नानी देवी, मूर्ति, रामरती, देवांश, अनुभव, रुद्राक्ष, चारू, परी, अथर्व, हितार्थ, दिव्या, सूबेदार कृष्ण कुमार, सूबेदार बाबूलाल, सुधीर धनखड़, एडवोकेट संतोष पवार, मदनलाल डूडेजा, राजेंद्र प्रसाद गुप्ता, सुरेंद्र कौशिक, कृष्ण कुमार गुप्ता, निखिल, हेमराज, निरंजन लाल, इम्तियाज, दिलशाद सहित अनेक लोग मौजूद रहे।

कार्यक्रम के अंत में वजीर सिंह ने सभी का आभार व्यक्त करते हुए शहीदों के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने और उनके अधूरे सपनों को साकार करने का संकल्प दोहराया।

वक्ताओं ने कहा कि 23 मार्च 1931 को भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव ने हंसते-हंसते अपने प्राण न्यौछावर कर दिए थे। उनका सपना एक ऐसे समाज का निर्माण करना था, जहां शोषण, अन्याय और असमानता का अंत हो। आजादी के 78 वर्ष बाद भी महंगाई, बेरोजगारी और सामाजिक अन्याय जैसी समस्याएं बरकरार हैं, जिन्हें समाप्त करने के लिए संगठित संघर्ष जरूरी है।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि वर्तमान समय में समाज को जाति, धर्म और क्षेत्र के नाम पर बांटने की कोशिशें हो रही हैं। ऐसे में शहीदों के विचारों को अपनाकर सामाजिक एकता और जागरूकता को मजबूत करना समय की मांग है।

अंत में सभी उपस्थित लोगों ने शपथ ली कि वे शहीदों के आदर्शों पर चलते हुए एक समानता आधारित और शोषणमुक्त समाज के निर्माण के लिए निरंतर संघर्ष करेंगे।

Bharat Sarathi
Author: Bharat Sarathi

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