महंगाई पर घमासान: पेट्रोल-डीजल व गैस कीमतों को लेकर विद्रोही ने केन्द्र सरकार पर साधा निशाना

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कच्चे तेल की कीमतें घटने के बावजूद राहत नहीं देने का आरोप, युद्ध के बहाने आमजन पर बोझ बढ़ाने की बात

रेवाडी, 21 मार्च 2026 – स्वयंसेवी संस्था ‘ग्रामीण भारत’ के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मांग की है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईरान–इजरायल–अमेरिका संघर्ष पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) (Iran–Israel–US conflict) के चलते बढ़ती महंगाई का बोझ आम जनता पर न डाला जाए।

विद्रोही ने आरोप लगाया कि पिछले दो वर्षों में वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बावजूद केन्द्र सरकार ने पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस के दामों में कोई राहत नहीं दी, बल्कि इससे हजारों करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया गया। उन्होंने कहा कि बीते 11 वर्षों में पेट्रोल-डीजल पर लगाए गए भारी करों से 30 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि एकत्र की गई है, जिसका उपयोग वर्तमान में बढ़ी कच्चे तेल की कीमतों को संतुलित करने के लिए किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि युद्ध शुरू होते ही सरकार ने रसोई गैस के दामों में 160 रुपये की वृद्धि की और अब प्रीमियम पेट्रोल में 2 रुपये प्रति लीटर तथा औद्योगिक डीजल में 22 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी कर दी गई है। इससे महंगाई को बढ़ावा मिलेगा और आमजन की आर्थिक स्थिति और खराब होगी।

विद्रोही ने सरकार के इस दावे को भी खारिज किया कि केवल प्रीमियम पेट्रोल के दाम बढ़ाए गए हैं। उनका कहना है कि जमीनी स्तर पर अधिकांश पेट्रोल पंपों पर उपभोक्ताओं को प्रीमियम पेट्रोल ही दिया जाता है, जिससे हर परिवार पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा।

उन्होंने कहा कि औद्योगिक डीजल की कीमत बढ़ने से परिवहन लागत बढ़ेगी, जिससे लगभग सभी उपभोक्ता वस्तुओं के दाम बढ़ना तय है। खाद्य सामग्री महंगी होने से आमजन का जीवन और कठिन हो जाएगा।

विद्रोही ने चेतावनी दी कि यदि यह युद्ध लंबा खिंचता है तो आम आदमी की आर्थिक स्थिति और बिगड़ेगी, वहीं युद्ध समाप्त होने के बाद भी महंगाई कम होने की संभावना नहीं दिखती।

अंत में उन्होंने केन्द्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि आमजन से वसूले गए धन का उपयोग कर राहत दी जानी चाहिए, न कि लगातार कीमतों में बढ़ोतरी कर जनता पर अतिरिक्त बोझ डाला जाए।

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Author: Bharat Sarathi

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