ग्रामीण भारत के अध्यक्ष का आरोप—सरसों मंडियों में आने के बाद भी एमएसपी खरीद में देरी से किसान 25% फसल औने-पौने दामों में बेचने को मजबूर
चंडीगढ़/रेवाडी, 15 मार्च 2026। स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेद प्रकाश विद्रोही ने हरियाणा की भाजपा सरकार पर अहीरवाल क्षेत्र में सरसों की न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीद तत्काल शुरू न करने को लेकर तीखी आलोचना की है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब सरसों की फसल मंडियों में आ चुकी है तो सरकार 28 मार्च से ही 6200 रुपये प्रति क्विंटल एमएसपी पर खरीद शुरू करने पर क्यों अड़ी हुई है।
विद्रोही ने कहा कि सरकार के इस बेरुखीपूर्ण रवैये के कारण अहीरवाल क्षेत्र के किसानों को अपनी कुल उत्पादन का लगभग 25 प्रतिशत हिस्सा 28 मार्च तक निजी व्यापारियों को औने-पौने दामों में बेचने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। उनका कहना था कि यदि सरकार वास्तव में एमएसपी पर खरीद को लेकर गंभीर है तो उसे तुरंत मंडियों में खरीद शुरू करनी चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार पिछले दो वर्षों से प्रदेश की रबी और खरीफ की 24 फसलों को एमएसपी पर खरीदने का दावा करके किसानों को भ्रमित कर रही है। विद्रोही ने कहा कि यदि सरकार को अपने दावे पर भरोसा है और उसे सरसों का एक-एक दाना एमएसपी पर खरीदना ही है, तो फिर 16 मार्च से खरीद शुरू करने में क्या दिक्कत है और 28 मार्च तक इंतजार क्यों किया जा रहा है।
विद्रोही के अनुसार सरकार की देरी से यह आशंका मजबूत होती है कि जानबूझकर खरीद में देरी की जा रही है ताकि किसान अपनी उपज का बड़ा हिस्सा निजी व्यापारियों को कम दामों में बेच दें। उन्होंने कहा कि इससे यह भी साबित होता है कि जमीन पर 24 फसलों की एमएसपी खरीद का दावा वास्तविकता से दूर है और केवल प्रचार के जरिए किसानों को गुमराह किया जा रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि हरियाणा सरकार ने अब तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि इस वर्ष सरसों की खरीद एमएसपी पर होगी या फिर पूर्व की तरह भावांतर योजना के तहत खरीद का दिखावा किया जाएगा।
वेद प्रकाश विद्रोही ने मांग की कि हरियाणा सरकार तुरंत अपना स्पष्ट रुख बताए कि सरसों की सरकारी खरीद एमएसपी पर होगी या भावांतर योजना के तहत। साथ ही अहीरवाल क्षेत्र की मंडियों में सरसों की सरकारी खरीद तत्काल शुरू की जाए ताकि किसानों को अपनी उपज औने-पौने दामों में बेचने के लिए मजबूर न होना पड़े।








