कांग्रेस के 37 विधायक होने के बावजूद निर्दलीय उम्मीदवार उतारना सत्ता, धन और जांच एजेंसियों के दुरुपयोग की आशंका पैदा करता है
“भाजपा का तीसरा उम्मीदवार उतारना लोकतांत्रिक परम्पराओं के साथ खिलवाड़ है। यह प्रयास विधायकों को खरीदने या डराने की राजनीति को दर्शाता है।” — वेदप्रकाश विद्रोही
चंडीगढ़/रेवाडी, 11 मार्च। स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने भाजपा नेतृत्व से सवाल करते हुए कहा कि यदि पार्टी की मंशा विधायकों की खरीद-फरोख्त, सत्ता और धन के प्रभाव या जांच एजेंसियों के दुरुपयोग के माध्यम से राज्यसभा चुनाव को प्रभावित करने की नहीं है, तो फिर यह जानते हुए भी कि हरियाणा विधानसभा में कांग्रेस के 37 विधायक हैं, भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार को चुनाव मैदान में उतारकर लोकतांत्रिक परम्पराओं का मज़ाक क्यों बनाया गया है।
विद्रोही ने कहा कि हरियाणा से राज्यसभा की दो सीटों के लिए चुनाव में निर्वाचित होने के लिए प्रत्येक उम्मीदवार को 31-31 विधायकों के समर्थन की आवश्यकता होती है। ऐसे में विधानसभा में संख्या बल के हिसाब से स्पष्ट है कि एक-एक सीट भाजपा और कांग्रेस के खाते में जानी चाहिए। इसके बावजूद भाजपा द्वारा तीसरा उम्मीदवार खड़ा किया जाना कई सवाल खड़े करता है।
उन्होंने कहा कि भाजपा यह कहकर जनता को गुमराह नहीं कर सकती कि तीसरा उम्मीदवार निर्दलीय है, क्योंकि वह आज भी भाजपा का सक्रिय सदस्य है। उसके नामांकन पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले 10 प्रस्तावकों में से 7 भाजपा विधायक और 3 भाजपा समर्थित निर्दलीय विधायक हैं। इससे स्पष्ट है कि सतीश नांदल वास्तव में निर्दलीय नहीं बल्कि भाजपा समर्थित उम्मीदवार हैं।
विद्रोही ने आरोप लगाया कि भाजपा अपने दूसरे उम्मीदवार को केवल कांग्रेस विधायकों को खरीदकर या उन्हें जांच एजेंसियों के भय से प्रभावित करके ही जिता सकती है। इससे साफ जाहिर होता है कि मोदी-भाजपा की लोकतंत्र और लोकतांत्रिक परम्पराओं में कोई वास्तविक आस्था नहीं है, बल्कि वह खरीद-फरोख्त की राजनीति के जरिए राज्यसभा चुनाव जीतना चाहती है। उन्होंने इसे अलोकतांत्रिक और संविधान विरोधी व्यवहार बताया।
विद्रोही ने कहा कि भाजपा द्वारा तीसरा उम्मीदवार उतारना कांग्रेस के लिए भी एक परीक्षा की घड़ी है। कांग्रेस को चाहिए कि वह अपनी कथित गुटबाजी को खत्म कर सभी 37 विधायकों के वोट अपने उम्मीदवार के पक्ष में डलवाकर भाजपा को करारा जवाब दे और यह साबित करे कि पार्टी में किसी प्रकार की फूट नहीं है।
उन्होंने कहा कि राज्यसभा चुनाव में ओपन वोटिंग होती है और कांग्रेस के प्रत्येक विधायक को अपने वोट को पार्टी के चुनाव एजेंट को दिखाकर डालना होता है। ऐसे में यह स्पष्ट हो जाएगा कि किस विधायक ने पार्टी के पक्ष में मतदान किया और किसने नहीं।
अंत में विद्रोही ने हरियाणा की जनता से भी अपील की कि वह राज्यसभा चुनाव में भाजपा के इस आचरण से समझे कि पार्टी की लोकतंत्र में कितनी आस्था है। उन्होंने कहा कि खरीद-फरोख्त की राजनीति लोकतंत्र और मतदाताओं के जनादेश का घोर अपमान है, जिसे जनता को समझना होगा।







