राजेश श्रीवास्तव

पूरा देश जब होली मना रहा था तो बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को लेकर भाजपा ने सियासत में एक ऐसा रंग घोला कि बिहार की पूरी सियासत ही बेरंग हो गयी। जब होली के दिन इस बात की खबर उड़ी कि नीतीश कुमार राज्यसभा जा सकते हैं तो शायद किसी को यकीन नहीं हो रहा था । मीडियाकर्मी भी इसे बहुत गंभीरता से नहीं ले रहे थे लेकिन जब गुरुवार सुबह नीतीश कुमार का एक्स पर ट्वीट आया तो खबर पक्की हो गयी लेकिन इसके साथ ही कई चर्चाओं ने भी जन्म ले लिया। क्या ये सब कुछ अचानक हो गया या फिर नवंबर 2०25 में ही इसकी पटकथा लिखी जा चुकी थी जब बिहार विधानसभा चुनाव परिणाम आये थे ।
बिहार विधानसभा चुनाव परिणाम आने के बाद इस बात की चर्चा बहुत तेजी से पैर पसार रही थी जब कम सीटें होने के बावजूद नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलायी गयी और भाजपा ने कहा कि चाहे कुछ भी हो जाये लेकिन हमारे नेता नीतीश कुमार ही होंगे। तभी ये साफ हो गया था कि इसमें कुछ न कुछ तो खेल हो रहा है और यह भी तय था कि नीतीश कुमार अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पायेंगे लेकिन इतनी जल्दी हो जायेगा, यह किसी को यकीन नहीं था। क्योंकि आधुनिक भाजपा का यह चाल-चरित्र और चेहरा रहा है कि वह सहयोगी दलों को बहुत देर तक बर्दाश्त नहीं करती, वह भी तब जब वह ‘अपर हैंड’ हो । ऐसा एक नहीं 6-7 राज्यों में अब तक हो चुका है। चाहे महाराष्ट्र हो, या अन्य राज्य जबकि पश्चिम बंगाल, झारखंड, पंजाब ऐसे राज्य हैं जहां अभी तक भाजपा अपनी इस सियासत को दोहरा नहीं पायी है।
सियासी गलियारों में फैले सूत्रों की मानें तो जब बिहार विधानसभा चुनाव परिणाम आये तभी नीतीश कुमार और भाजपा में यह डील हो गयी थी कि आप तीन महीने सत्ता संभालिये बाद में आप केंद्र में आ जाइयेगा और बिहार में भाजपा का सीएम हो जायेगा। कम सीटें आने के चलते नीतीश कुमार ने यह स्वीकार कर लिया था। और इसी डील के चलते नीतीश कुमार ने गुरुवार सुबह ही खुद ट्वीट किया कि वह राज्यसभा जाना चाहते हैं। उन्होने लिखा कि उनकी एक इच्छा थी कि वह राज्यसभा भी जायें आज उनकी यह इच्छा पूरी हो रही है।
अब भला कौन पत्रकार होगा जो नीतीश कुमार के इस स्वघोष पर ऐतबार करेगा क्योंकि देश के इतिहास में आज तक कोई ऐसा सिटिंग मुख्मयंत्री नहीं हुआ जो अपना पद अपनी मर्जी से छोड़कर राज्यसभा जाना चाहता हो, वह भी तब जब नीतीश कुमार 21 साल पहले ही केंद्र में कैबिनेट मंत्री रहते हुए कृषि महकमे जैसा अहम पद संभाल चुके हैं। इसीलिए नीतीश कुमार का यह बयान लिखा कहीं और गया है उसे केवल नीतीश कुमार ने अपने अकांउट से पोस्ट भर किया है।
लेकिन यह साफ है कि बिहार में भाजपा की राह आसान नहीं होगी क्योंकि बिहार में जनता ने नीतीश कुमार को बहुमत दिया था। वह मुख्यमंत्री के रूप में नीतीश कुमार को देखना चाहती है।
बिहार की राजनीति में एक बड़े युग का समापन होने जा रहा है। महज 1०5 दिन पहले 1०वीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाले नीतीश कुमार का बिहार की सत्ता छोड़ना राज्य में पीढ़ीगत बदलाव का अंतिम चरण है। उनके इस फैसले ने न केवल जदयू के भविष्य पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि एनडीए की सबसे बड़ी पार्टी- भाजपा के लिए बिहार की राजनीति के समीकरणों को पूरी तरह बदल दिया है।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा के नामांकन की बात कहने के साथ ही यह तय हो गया है कि राज्य में सत्ता परिवर्तन होने जा रहा है। बीते नवंबर राज्य में हुए विधानसभा चुनाव में एनडीए को प्रचंड बहुमत के साथ जीत मिली थी। 89 सीटें जीतकर भाजपा विधानसभा में सबसे बड़ी पार्टी बनी थी। इसके बाद भी चुनाव पूर्व किए वादे के मुताबिक, राज्य की बागडोर 85 सीटें जीतने वाले जदयू के नीतीश कुमार के हाथ में आई। नीतीश के सत्ता संभालने के महज 1०5 दिन बाद यह तय हो गया है कि बिहार में नीतीश राज का अंत होने जा रहा है। इसके साथ ही इस बात की भी संभावना जताई जा रही है कि राज्य में पहली बार भाजपा अपना मुख्यमंत्री बना सकती है।
198० में अपने जन्म के साथ ही भाजपा को हिदी भाषी राज्यों की पार्टी के रूप में पहचना मिली। बीते साढ़े चार दशक में पार्टी दो लोकसभा सीट से 3०० से अधिक सीटें जीतने वाली पार्टी बन चुकी है। एक समय देश के 21 राज्यों में भाजपा और उसके सहयोगियों की सरकार रही। अभी भी पार्टी 2० राज्यों की सत्ता में हिस्सेदार है।
इन सबके बावजूद हिदी हार्टलैंड की पार्टी कही जाने वाली भाजपा देश के दूसरे सबसे बड़े हिदी भाषी राज्य में अब तक अपना मुख्यमंत्री नहीं बना सकी है। इसके अलावा अन्य हिदी भाषी राज्यों की बात करें तो यूपी, हरियाणा, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश की सत्ता में भाजपा दो या दो से ज्यादा बार से सत्ता में है। छत्तीसगढ़ और राजस्थान में पार्टी ने पांच साल बाद फिर से सत्ता में वापसी की है। राजधानी दिल्ली में भी 27 साल बाद पार्टी ने सत्ता में वापसी की है। वहीं, हिमाचल प्रदेश, झारखंड में भी पार्टी अपना मुख्यमंत्री बना चुकी है।







