पिछले दो राज्यसभा चुनावों की तरह इस बार भी क्रॉस वोटिंग की आशंका, भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार से मुकाबला रोचक
नई दिल्ली/चंडीगढ़, 5 मार्च। हरियाणा में राज्यसभा की दो सीटों के लिए चुनावी मुकाबला दिलचस्प होता दिखाई दे रहा है। पेरिस इंटरनेशनल ओलम्पिक से शतरंज एशिया महाद्वीप के महासचिव ब्रह्मचारी कुलदीप शतरंज ने कहा कि दो सीटों के लिए तीन उम्मीदवारों के मैदान में आने से राज्यसभा चुनाव में राजनीतिक ‘खेला’ होने की पटकथा तैयार हो चुकी है।
उन्होंने बताया कि भाजपा की ओर से करनाल के पूर्व सांसद संजय भाटिया, कांग्रेस की ओर से कर्मचारी नेता कर्मवीर बौद्ध तथा भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार सतीश नांदल ने नामांकन दाखिल किया है। तीसरे उम्मीदवार के मैदान में आने से अब 16 मार्च को मतदान होना तय हो गया है।
पिछले दो चुनावों में भी हुआ ‘खेला’
कुलदीप शतरंज के अनुसार हरियाणा के पिछले दो राज्यसभा चुनावों में भी अप्रत्याशित राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिला था। पहले चुनाव में भाजपा समर्थित सुभाष चंद्रा और दूसरे चुनाव में भाजपा समर्थित कार्तिकेय शर्मा राज्यसभा पहुंचे थे। इस बार भी उसी तरह के हालात बनते दिखाई दे रहे हैं।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस उम्मीदवार कर्मवीर बौद्ध को सीधे हाईकमान द्वारा उम्मीदवार बनाए जाने से कई कांग्रेस विधायक उन्हें पहले से जानते तक नहीं थे। बौद्ध तीन वर्ष पहले हरियाणा सचिवालय से द्वितीय श्रेणी कर्मचारी के रूप में सेवानिवृत्त हुए हैं और कई विधायकों ने पहली बार उनसे मुलाकात तब की जब वे समर्थन मांगने पहुंचे।
भाजपा समर्थित निर्दलीय से मुकाबला
दो सीटों के लिए तीन उम्मीदवारों के मैदान में आने के बाद मुकाबला रोचक हो गया है। रोहतक जिले की गढ़ी सांपला-किलोई सीट से पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के खिलाफ तीन बार चुनाव लड़ चुके सतीश नांदल ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में नामांकन दाखिल किया है, जिन्हें भाजपा का समर्थन प्राप्त है।
नांदल पहले इनेलो से जुड़े रहे हैं और पार्टी प्रमुख अभय सिंह चौटाला के भी करीबी माने जाते हैं। उन्होंने 2009 और 2014 में इनेलो के टिकट पर तथा 2019 में भाजपा के टिकट पर हुड्डा के खिलाफ चुनाव लड़ा था, हालांकि तीनों बार उन्हें हार का सामना करना पड़ा।
कांग्रेस ने किया समर्थन का ऐलान
कांग्रेस की ओर से पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा, पार्टी महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला और पूर्व केंद्रीय मंत्री कुमारी सैलजा ने कर्मवीर बौद्ध की उम्मीदवारी का समर्थन किया है। हालांकि भाजपा द्वारा निर्दलीय उम्मीदवार को समर्थन देने के बाद अब चुनाव में मतदान होना तय माना जा रहा है।
90 विधायकों का गणित
हरियाणा विधानसभा में कुल 90 विधायक हैं और राज्यसभा चुनाव में जीत के लिए किसी भी उम्मीदवार को कम से कम 31 प्रथम वरीयता वोटों की आवश्यकता होती है।
कांग्रेस के पास फिलहाल 37 विधायक हैं, जिससे उसके उम्मीदवार की जीत का रास्ता आसान माना जा रहा है। वहीं भाजपा के पास 48 विधायक हैं और तीन निर्दलीय विधायकों का समर्थन भी उसे प्राप्त है। भाजपा के पास 31 वोट देने के बाद 17 अतिरिक्त वोट बचते हैं, जो निर्दलीय उम्मीदवार के लिए अहम हो सकते हैं।
फिलहाल सभी सीटों पर भाजपा का प्रभाव
हरियाणा से राज्यसभा की कुल पांच सीटों में से चार पर भाजपा के सांसद हैं, जबकि एक निर्दलीय सांसद कार्तिकेय शर्मा हैं, जो भाजपा के समर्थन से ही चुने गए थे।
भाजपा सांसद रामचंद्र जांगड़ा और किरण चौधरी का कार्यकाल 9 अप्रैल को समाप्त हो रहा है, जिसके कारण यह चुनाव कराया जा रहा है। इस चुनाव में जीतने वाले उम्मीदवारों का कार्यकाल 10 अप्रैल 2026 से 9 अप्रैल 2032 तक रहेगा।
कुलदीप शतरंज के अनुसार अगले कुछ दिनों में राजनीतिक गतिविधियां तेज रहेंगी और क्रॉस वोटिंग की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। ऐसे में हरियाणा का यह राज्यसभा चुनाव एक बार फिर राजनीतिक ‘खेला’ का केंद्र बन सकता है।







