गुरुग्राम में कांग्रेस का संगठनात्मक संकट गहराया, धरना प्रदर्शन में सिमटा जनाधार

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प्रदेश के आदेश पर हुआ प्रदर्शन, लेकिन जुटे 40 से भी कम कार्यकर्ता

वरिष्ठ नेताओं की गैरहाजिरी और नियुक्तियों पर उठे सवालों ने खोली संगठन की पोल

गुरुग्राम, 16 फरवरी 2026। गुरुग्राम में कांग्रेस का संगठनात्मक ढांचा गंभीर संकट से गुजरता दिखाई दे रहा है। सोमवार को जिला कांग्रेस कमेटी द्वारा लघु सचिवालय पर आयोजित धरना प्रदर्शन ने पार्टी की जमीनी हकीकत उजागर कर दी। यह कार्यक्रम हरियाणा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के निर्देश पर पूरे प्रदेश में आयोजित किया गया था, लेकिन गुरुग्राम में इसका असर बेहद सीमित रहा।

धरना स्थल पर जिला अध्यक्ष (शहरी) पंकज डावर, विधानसभा प्रत्याशी मोहित ग्रोवर, मेयर प्रत्याशी सीमा पाहुजा और अनुसूचित जाति विभाग के जिला अध्यक्ष राजकुमार मौजूद रहे। इसके बावजूद प्रदर्शन में 40 से भी कम कार्यकर्ता जुट पाए। प्रदेशव्यापी आह्वान के बावजूद इतनी कम भागीदारी ने संगठन की पकड़ और कार्यकर्ताओं के मनोबल पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

वरिष्ठ चेहरे रहे नदारद, संदेश गया गलत

धरना प्रदर्शन में कई प्रमुख नेताओं की अनुपस्थिति चर्चा का विषय बन गई। जिला कांग्रेस (ग्रामीण) अध्यक्ष वर्धन यादव सहित कई वरिष्ठ पदाधिकारी कार्यक्रम से दूरी बनाए रहे। पार्षद चुनाव लड़ चुके अधिकांश पूर्व उम्मीदवार भी नजर नहीं आए। राजनीतिक हलकों में इसे संगठन के भीतर समन्वय की कमी और नेतृत्व के प्रति असंतोष के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

नियुक्तियों और टिकट वितरण पर असंतोष

अंदरखाने असंतोष की आग भी खुलकर सामने आने लगी है। कुछ कार्यकर्ताओं ने नाम न छापने की शर्त पर आरोप लगाया कि हालिया नियुक्तियों में पार्टी संविधान की अनदेखी की गई। तीन वर्ष की सक्रिय सदस्यता के नियम को दरकिनार कर बाहरी पृष्ठभूमि के लोगों को पद दे दिए गए।

कार्यकर्ताओं का यह भी आरोप है कि टिकट वितरण के दौरान जमीनी कार्यकर्ताओं की अनदेखी की गई। सेल्फ डिक्लेरेशन फॉर्म, पहचान पत्र और बूथ स्तर की सत्यापन प्रक्रिया पूरी किए बिना ही कई लोगों को जिम्मेदारियां सौंप दी गईं। इससे वर्षों से पार्टी के लिए काम कर रहे समर्पित कार्यकर्ता स्वयं को हाशिए पर महसूस कर रहे हैं।

धरने में गुटबाज़ी की झलक

धरना प्रदर्शन के दौरान कुछ कार्यकर्ताओं द्वारा व्यक्तिगत समर्थन में नारेबाजी किए जाने पर भी आपत्ति दर्ज की गई। इससे स्पष्ट संकेत मिला कि संगठन के भीतर गुटबाज़ी गहराती जा रही है। आम जनता और मीडिया के सामने यह दृश्य पार्टी की छवि पर भी असर डाल गया।

प्रदेश से राष्ट्रीय स्तर तक पहुंची चर्चा

सूत्रों के अनुसार, गुरुग्राम इकाई की अंदरूनी कलह की जानकारी अब प्रदेश कार्यालय से आगे बढ़कर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के राष्ट्रीय स्तर तक पहुंच चुकी है। पार्टी नेतृत्व स्थिति की समीक्षा कर रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि समय रहते संगठनात्मक ढांचे में सुधार, पारदर्शिता और सामंजस्य स्थापित नहीं किया गया, तो गुरुग्राम में कांग्रेस की राजनीतिक जमीन और खिसक सकती है।

अब सबकी निगाहें पार्टी हाईकमान के फैसले पर टिकी हैं—क्या वर्तमान नेतृत्व पर भरोसा कायम रहेगा या संगठन में बड़े बदलाव कर नई ऊर्जा और एकजुटता लाने की कोशिश की जाएगी?

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Author: Bharat Sarathi

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