— एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी

Henley & Partners द्वारा जारी Henley Passport Index 2026 में भारत ने 10 पायदान की छलांग लगाते हुए 85वें से 75वें स्थान पर पहुंचकर सकारात्मक संकेत दिया है। अब भारतीय पासपोर्ट धारकों को 56 देशों में वीज़ा-फ्री या वीज़ा-ऑन-अराइवल सुविधा प्राप्त है।
उपलब्धि का पक्ष
- रैंक सुधार भारत की कूटनीतिक सक्रियता और वैश्विक स्वीकार्यता का संकेत है।
- ‘एक्ट ईस्ट’, ‘नेबरहुड फर्स्ट’ जैसी नीतियों से अफ्रीका, दक्षिण-पूर्व एशिया व कैरिबियन देशों से संबंध मजबूत हुए।
- दो देशों द्वारा वीज़ा-फ्री सुविधा समाप्त होने के बावजूद रैंक बढ़ना दर्शाता है कि इंडेक्स तुलनात्मक है—अन्य देशों की गिरावट से भी भारत ऊपर आया।
चुनौती का पक्ष
- नवंबर 2025 में ईरान ने वीज़ा-फ्री सुविधा रोकी (धोखाधड़ी/ट्रैफिकिंग मामलों के कारण)।
- बोलीविया ने वीज़ा-ऑन-अराइवल के स्थान पर ई-वीज़ा अनिवार्य किया।
- 56 देशों की पहुंच अभी भी शीर्ष देशों से काफी कम है—पहले स्थान पर सिंगापुर (192 गंतव्य), उसके बाद जापान।
- विकसित देशों (शेंगेन क्षेत्र, अमेरिका, कनाडा) में वीज़ा प्रक्रिया अब भी जटिल।
ऐतिहासिक संदर्भ
भारत 2006 में 71वें स्थान पर था। तब वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य अलग था। पिछले दो दशकों में अवैध आव्रजन, आतंकवाद और मानव तस्करी के कारण वीज़ा नियम सख्त हुए हैं।
क्षेत्रीय तुलना
दक्षिण एशिया में भारत की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर है; उदाहरणतः पाकिस्तान 97वें स्थान पर है। फिर भी भारत वैश्विक औसत से पीछे है।
निष्कर्ष
भारत की 10 पायदान की छलांग प्रशंसनीय है—यह वैश्विक साख और कूटनीतिक संतुलन का संकेत देती है। परंतु दो देशों द्वारा वीज़ा-फ्री सुविधा समाप्त किया जाना चेतावनी भी है कि नागरिक आचरण, प्रवासी प्रबंधन और अंतरराष्ट्रीय विश्वास को मजबूत करना आवश्यक है।
यह रैंकिंग उपलब्धि के साथ आत्ममंथन का अवसर भी है—ताकि भारत 2006 की सर्वोच्च रैंक को पार कर भविष्य में और सशक्त वैश्विक गतिशीलता हासिल कर सके।
-संकलनकर्ता लेखक – क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए(एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र







