
गुरुग्राम, 15 फरवरी 2026 – ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा आयोजित “सरस आजीविका मेला 2026” में इस बार कारीगरों की बेमिसाल कला और महीन हस्तशिल्प ने गुरुग्राम की जनता का विशेष ध्यान आकर्षित किया है। मेले में 4 लाख रुपये की पश्मीना शॉल और 2 लाख 20 हजार रुपये तक की साड़ियों ने लोगों को हैरान भी किया और प्रभावित भी।
सरस आजीविका मेला 2026 में प्रतिदिन नए रंग और नई कहानियां सामने आ रही हैं। ‘लखपति दीदी’ पवेलियन भी आगंतुकों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है, जहां आत्मनिर्भरता और सफलता की प्रेरक गाथाएं प्रस्तुत की जा रही हैं।

सरस मेला आज अरुणाचल की कलाकार जेली काई तमीन के फोक फ्यूज़न कार्यक्रम से आज झूम उठा।
कच्छ, गुजरात से आईं पानबाई बताती हैं कि उन्होंने 1,20,000 रुपये की मेरिनो वूलन शॉल तैयार की है। इस शॉल को दो कारीगर मिलकर हैंडलूम मशीन पर बुनते हैं और इसे तैयार करने में लगभग तीन महीने का समय लगता है। हर धागा बारीकी और धैर्य से पिरोया जाता है, जो इसकी विशेषता को दर्शाता है।

जम्मू-कश्मीर से आईं प्रीति सोजनी शॉल लेकर पहुंची हैं, जिसकी कीमत लगभग ढाई लाख रुपये है। यह शॉल रेशम के धागों से तैयार होती है और इसे बनाने में करीब ढाई साल का समय लगता है। 22 स्वयं सहायता समूह की महिलाएं मिलकर इस उत्कृष्ट शॉल को तैयार करती हैं।
इसी तरह 2,20,000 रुपये की कानी वीविंग साड़ी भी मेले में आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। मिक्स पश्मीना और सिल्क से तैयार इस साड़ी के बारे में जम्मू-कश्मीर से आईं बिस्मा बताती हैं कि इसके साल में 4 से 5 विशेष ऑर्डर आते हैं। पारंपरिक बुनाई और महीन कारीगरी के कारण यह साड़ी ग्राहकों द्वारा अत्यधिक पसंद की जाती है।
मेले में प्रदर्शित 4 लाख रुपये की सुई के काम से सजी पश्मीना शॉल भी चर्चा में है। इसे दो अनुभवी कारीगर तैयार करते हैं। इस कला को सीखने में लगभग पांच वर्ष का समय लग जाता है। अत्यंत धैर्य, एकाग्रता और संतुलन के साथ इसे तैयार किया जाता है, तभी इसकी सुंदरता और गुणवत्ता निखर कर सामने आती है।







