मुख्यमंत्री का बुढ़ापा पेंशन पर दावा आधा सच, बुजुर्गों को ठगने का प्रयास : विद्रोही

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घोषित बढ़ोतरी अब तक लागू नहीं, चुनावी राजनीति के तहत पेंशन बढ़ाने और बाद में काटने का आरोप

रेवाडी, 7 फरवरी 2026। स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी द्वारा मीडिया में बुढ़ापा पेंशन को लेकर किया गया दावा आधा सच है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने भाजपा सरकार की प्रशंसा करते हुए अधूरे आंकड़े प्रस्तुत कर बुजुर्गों को गुमराह करने का प्रयास किया है।

विद्रोही के अनुसार कटु सत्य यह है कि प्रदेश में चुनावों से पहले भाजपा सरकार वोट बैंक की राजनीति के तहत बुढ़ापा पेंशन प्राप्त करने वालों की संख्या बढ़ाती है और चुनाव समाप्त होते ही पेंशन काटने की साजिश शुरू हो जाती है। उनका आरोप है कि ऐसा ही 2019 विधानसभा चुनाव से पहले और बाद में हुआ तथा 2024 विधानसभा चुनाव में भी यही कहानी दोहराई गई।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने 1 नवंबर 2025 से बुढ़ापा पेंशन में 200 रुपये मासिक वृद्धि की घोषणा की थी, लेकिन तीन महीने बीतने के बाद भी इसे लागू नहीं किया गया है और बुजुर्गों को अभी भी 3000 रुपये मासिक पेंशन ही मिल रही है। विद्रोही ने याद दिलाया कि फरवरी 2024 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने बजट पेश करते समय 1 नवंबर 2024 से पेंशन में 250 रुपये मासिक बढ़ोतरी की घोषणा की थी, जो आज तक लागू नहीं हुई। बाद में 1 नवंबर 2025 से 200 रुपये बढ़ाने की घोषणा भी अधूरी रह गई।

उन्होंने सवाल उठाया कि यदि सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में ही सरकार ठगी का रवैया अपनाने लगे तो उसकी नीयत पर प्रश्नचिह्न लगना स्वाभाविक है। विद्रोही ने यह भी आरोप लगाया कि पेंशन की शर्तों में बदलाव कर ऐसी व्यवस्था कर दी गई है, जिससे प्रदेश के लाखों बुजुर्गों की पेंशन कटने का रास्ता खुल गया और नए नियमों के बाद हजारों बुजुर्ग पेंशन से वंचित भी हो चुके हैं।

मुख्यमंत्री के इस दावे को भी उन्होंने गलत बताया कि भाजपा शासन में सबसे ज्यादा पेंशन बढ़ी है। विद्रोही ने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा दिए गए आंकड़े ही इस दावे का खंडन करते हैं। उनके अनुसार कांग्रेस ने अपने साढ़े नौ साल के शासन में बुढ़ापा पेंशन 300 रुपये से बढ़ाकर 1000 रुपये की थी, जो 333 प्रतिशत वृद्धि है, जबकि भाजपा ने इसे 1000 रुपये से बढ़ाकर 3200 रुपये किया, जो 320 प्रतिशत वृद्धि बनती है।

विद्रोही ने तंज कसते हुए कहा कि यदि मुख्यमंत्री का गणित कमजोर नहीं है तो वे स्वयं तय करें कि साढ़े नौ वर्षों में 333 प्रतिशत बढ़ोतरी अधिक है या 12 वर्षों में 320 प्रतिशत। उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा सरकार ने बुढ़ापा पेंशन का नाम बदलकर “सम्मान भत्ता” तो कर दिया, लेकिन उसमें शर्तें थोपना बुजुर्गों का सम्मान है या अपमान—यह मुख्यमंत्री को अपनी अंतरात्मा से पूछना चाहिए।

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Author: Bharat Sarathi

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