डीसी ने कहा, राह-वीर को लेकर फैले मिथक पूरी तरह निराधार, कानून देता है पूर्ण सुरक्षा
गुरुग्राम, 02 फरवरी। डीसी अजय कुमार ने आमजन से अपील करते हुए कहा कि सड़क दुर्घटना के समय ‘गोल्डन आवर’ में दी गई त्वरित सहायता किसी की जान बचा सकती है और ऐसे में आगे आने वाले राह-वीरों (नेक आदमी) को किसी भी प्रकार के डर या कानूनी झंझट की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने बताया कि मोटर वाहन (संशोधन) अधिनियम, 2019 की धारा 134ए के तहत अधिसूचित गुड समैरिटन नियमों के अनुसार दुर्घटना पीड़ित की मदद करने वाले व्यक्ति को न तो हिरासत में लिया जा सकता है, न उससे जबरन व्यक्तिगत जानकारी मांगी जा सकती है और न ही उसे अनावश्यक कानूनी प्रक्रियाओं में उलझाया जा सकता है।
डीसी अजय कुमार ने प्रचलित मिथकों को दूर करते हुए बताया कि सड़क दुर्घटना में घायल की सहायता करने पर किसी प्रकार की कानूनी परेशानी नहीं होती। यह धारणा पूरी तरह गलत है कि मदद करने वाले व्यक्ति को पुलिस या अदालतों के चक्कर लगाने पड़ते हैं, अस्पताल में रुकने या इलाज का खर्च उठाने के लिए मजबूर किया जाता है अथवा एफआईआर दर्ज कराने या गवाही देने के लिए बाध्य किया जाता है। कानून के तहत राह-वीर को गुमनाम रहने का पूरा अधिकार है, उससे व्यक्तिगत विवरण साझा करने के लिए दबाव नहीं बनाया जा सकता और उसे हिरासत में नहीं लिया जा सकता। डीसी ने कहा कि ऐसे मिथकों के कारण मदद से पीछे हटना मानवता के खिलाफ है, जबकि सच्चाई यह है कि व्यवस्था राह-वीरों की सुरक्षा, सम्मान और गरिमा सुनिश्चित करती है, ताकि लोग बिना डर के आगे आकर अनमोल जीवन बचा सके।
डीसी ने कहा कि राह-वीर बनने के लिए किसी चिकित्सकीय प्रशिक्षण या विशेष उपकरण की जरूरत नहीं होती—कभी-कभी केवल मदद करने की इच्छाशक्ति ही सबसे बड़ा योगदान होती है। उन्होंने बताया कि ‘राह-वीर (नेक आदमी) योजना’ के तहत जो व्यक्ति दुर्घटना पीड़ित को गोल्डन आवर के भीतर चिकित्सा सहायता दिलाने में मदद करता है, उसे 25,000 रुपये का पुरस्कार व प्रशंसा पत्र प्रदान किया जाता है, और एक वर्ष में अधिकतम पांच बार तक यह सम्मान मिल सकता है। डीसी ने कहा कि राह-वीर केवल एक योजना नहीं, बल्कि मानवता, साहस और सामूहिक जिम्मेदारी का प्रतीक हैं; इसलिए किसी दुर्घटना को देखकर पीछे न हटें—आपकी तत्परता किसी के जीवन और मृत्यु के बीच का अंतर बन सकती है।









