कला ग्राम चाय चौपाल में मयूरभंज छाउ नृत्य की भव्य प्रस्तुति ……

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कला ग्राम सोसाइटी द्वारा आयोजित कार्यक्रम में पारंपरिक नृत्य से रूबरू हुए दर्शक

जिला प्रशासन के मार्गदर्शन में लोक कला संरक्षण की दिशा में सराहनीय पहल

गुरुग्राम, 19 जनवरी- डीसी अजय कुमार के मार्गदर्शन में कला ग्राम सोसाइटी द्वारा कला ग्राम चाय चौपाल के अंतर्गत मयूरभंज छाउ नृत्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस आयोजन का उद्देश्य भारतीय पारंपरिक लोक नृत्य शैलियों के संरक्षण, संवर्धन एवं सांस्कृतिक जागरूकता को बढ़ावा देना रहा। कार्यक्रम जिला प्रशासन के सहयोग से सफलतापूर्वक संपन्न हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में कला प्रेमियों ने सहभागिता की।

कार्यक्रम में देश के प्रसिद्ध मयूरभंज छाउ नृत्य कलाकार राकेश साईं बाबू एवं उनके दल ने अपनी सशक्त, अनुशासित और ऊर्जावान प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। पारंपरिक वेशभूषा, सटीक शारीरिक गतियों, वीर रस एवं भावात्मक प्रस्तुति के माध्यम से कलाकारों ने मंच पर भारतीय सांस्कृतिक विरासत की गौरवशाली झलक प्रस्तुत की।

कार्यक्रम का शुभारंभ मानव गुप्ता द्वारा संचालित इनर रिस्पॉन्स सेशन से हुआ, जिसमें दर्शकों की उत्साहपूर्ण एवं सक्रिय सहभागिता देखने को मिली। कार्यक्रम का संचालन डॉ. मीनाक्षी पांडेय एवं सुश्री आकांक्षा अंशु द्वारा किया गया।

मयूरभंज छाउ नृत्य के अंतर्गत प्रस्तुत नटराज नृत्य, मार्शल आर्ट आधारित नृत्य, भगवद् गीता उपदेश तथा अभिमन्यु वध की सशक्त एवं भावनात्मक प्रस्तुतियाँ कार्यक्रम का विशेष आकर्षण रहीं। कलाकारों की भाव-गहराई, मंच अनुशासन एवं अभिव्यक्ति क्षमता ने दर्शकों को भाव-विभोर कर दिया।

कार्यक्रम के समापन अवसर पर कलाकार राकेश साईं बाबू ने युवा पीढ़ी को संबोधित करते हुए भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों, अनुशासन और परंपराओं से जुड़ने का प्रेरणादायक संदेश दिया। वहीं कला ग्राम की निदेशक शिखा गुप्ता ने सभी कलाकारों का अभिनंदन करते हुए आयोजन को सफल बनाने में सहयोग देने वाले जिला प्रशासन, संबंधित विभागों, समिति सदस्यों एवं कला प्रेमियों के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया।

इस अवसर पर समिति सदस्य सीमा सेठ, मोहन कांत सहित कला ग्राम सोसाइटी के अन्य गणमान्य सदस्य एवं बड़ी संख्या में कला प्रेमी उपस्थित रहे।

यह पहल गुरुग्राम में पारंपरिक एवं मूल नृत्य रूपों के माध्यम से सांस्कृतिक जागरूकता को बढ़ावा देने तथा भारतीय विरासत को जीवंत बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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Author: Bharat Sarathi

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