संघ शताब्दी वर्ष पर सोहना रोड स्थित GNH कन्वेंशन में हुई प्रमुख जन गोष्ठी
गुरुग्राम, 18 जनवरी 2026 : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रमों की श्रृंखला के अंतर्गत सोहना रोड स्थित GNH कन्वेंशन सेंटर में एक प्रमुख जन गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस गोष्ठी में गुरुग्राम के नवीन भाग से जुड़े समाज के विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय लगभग 300 प्रबुद्ध नागरिकों ने सहभागिता की।
गोष्ठी के मुख्य वक्ता विश्व हिन्दू परिषद के अंतरराष्ट्रीय संयुक्त महासचिव डॉ. सुरेंद्र जैन रहे। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व राजस्व विभाग के शीर्ष अधिकारी (आईआरएस) मोहनीश वर्मा, गुरुग्राम नवीन भाग के संघचालक रमेश गुप्ता, गुरुग्राम विभाग के कार्यवाह बृजेश चौहान, तथा गुरुग्राम महानगर संघचालक जगदीश ग्रोवर विशेष रूप से उपस्थित रहे। इस अवसर पर पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की पुत्रवधू श्रीमती नीरा शास्त्री की उपस्थिति भी उल्लेखनीय रही।
परिवार टूटे तो समाज और राष्ट्र भी कमजोर होता है
मुख्य वक्ता डॉ. सुरेंद्र जैन ने अपने संबोधन में कहा कि आज के बदलते सामाजिक परिदृश्य में टूटते परिवार सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभर रहे हैं। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि परिवार के विघटन से केवल व्यक्ति नहीं, बल्कि पहले समाज और अंततः राष्ट्र कमजोर होता है।
डॉ. जैन ने कहा कि परिवार व्यवस्था भारत की विशिष्ट देन है, जो केवल व्यक्तिगत सुख के लिए नहीं, बल्कि सामाजिक कल्याण और राष्ट्रीय एकता के लिए आवश्यक है। कुटुंब प्रबोधन के विषय पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि सभी को मिलकर परिवार व्यवस्था को सशक्त बनाना होगा।
उन्होंने एम्स (AIIMS) द्वारा किए गए एक शोध का उल्लेख करते हुए बताया कि टूटे परिवारों के बच्चे मानसिक तनाव व अन्य गंभीर बीमारियों से अधिक ग्रसित पाए गए हैं। यदि यह प्रवृत्ति नहीं रुकी तो सामाजिक समस्याएं और बढ़ेंगी। समाधान के रूप में उन्होंने परिवार के साथ समय बिताने और मोबाइल फोन से दूरी (डिजिटल उपवास) जैसी व्यवहारिक सलाह दी।
इसके अतिरिक्त डॉ. जैन ने पंच परिवर्तन—पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक समरसता, नागरिक कर्तव्य, कुटुंब प्रबोधन तथा स्वबोध—पर भी विस्तार से प्रकाश डाला।
भौतिकवाद से ऊपर उठकर चरित्र निर्माण आवश्यक : मोहनीश वर्मा
मुख्य अतिथि आईआरएस मोहनीश वर्मा ने कहा कि आज का समाज हर वस्तु को त्वरित गति से प्राप्त करना चाहता है, जिसके कारण भौतिकवाद तेजी से बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि आज कई लोग जीवन को केवल धन और संसाधनों के दृष्टिकोण से देखने लगे हैं, जो समाज के लिए घातक है।
उन्होंने जोर देते हुए कहा कि व्यक्तिगत चरित्र निर्माण के साथ-साथ सामाजिक चरित्र निर्माण भी आवश्यक है, तभी एक सशक्त राष्ट्र का निर्माण संभव है।
संघ का कार्य और विचारधारा समाज निर्माण की धुरी : बृजेश चौहान
गुरुग्राम विभाग के कार्यवाह बृजेश चौहान ने संघ की पृष्ठभूमि, विचारधारा और कार्यपद्धति पर प्रकाश डालते हुए संघ की स्थापना से लेकर आज तक की यात्रा तथा देशभर में संचालित प्रकल्पों की जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि आरएसएस आज दुनिया का सबसे बड़ा स्वयंसेवी संगठन है। संघ संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार के जीवन चरित्र का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि कठिन पारिवारिक परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने राष्ट्र सेवा का संकल्प लिया, जिसका परिणाम आज विश्व के सामने है।
कार्यक्रम का मंच संचालन रत्नेश ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन अनिल कश्यप द्वारा प्रस्तुत किया गया।
संघ शताब्दी वर्ष : सात प्रमुख आयोजन
गुरुग्राम महानगर संघचालक जगदीश ग्रोवर ने जानकारी देते हुए बताया कि आरएसएस की स्थापना के 100 वर्ष पूर्ण होने पर इसे संघ शताब्दी वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है।
शताब्दी वर्ष के अंतर्गत कुल सात प्रमुख आयोजन किए जाएंगे। विजय दशमी उत्सव और नवंबर-दिसंबर में चले सघन गृह संपर्क अभियान के बाद यह प्रमुख जन गोष्ठी आयोजित की गई।
उन्होंने बताया कि गुरुग्राम महानगर को दो भागों में विभाजित किया गया है और गुरुग्राम नवीन भाग में यह पहली गोष्ठी है। आगे गुरुग्राम विश्वविद्यालय सहित अन्य शिक्षण संस्थानों में पंच परिवर्तन—पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक समरसता, नागरिक कर्तव्य, कुटुंब प्रबोधन और स्वदेशी जीवनशैली—पर आधारित गोष्ठियों का आयोजन किया जाएगा।









