मनरेगा को कमजोर करना ग्रामीण भारत पर सीधा हमला: चौधरी संतोख सिंह

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कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने कहा— मनरेगा को उसके मूल अधिकार-आधारित स्वरूप में तत्काल बहाल किया जाए

गुरुग्राम | 10 जनवरी 2025 – कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं जिला बार एसोसिएशन गुरुग्राम के पूर्व प्रधान चौधरी संतोख सिंह ने केंद्र सरकार पर मनरेगा को योजनाबद्ध तरीके से कमजोर करने का आरोप लगाते हुए कहा कि यह कदम सीधे तौर पर ग्रामीण भारत, गरीबों और वंचित वर्गों पर हमला है। उन्होंने कहा कि बढ़ती बेरोज़गारी, महँगाई और आर्थिक असमानता के इस दौर में मनरेगा ग्रामीण जनता के लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच रहा है, जिसे मौजूदा नीतियों के कारण धीरे-धीरे निष्प्रभावी किया जा रहा है।

चौधरी संतोख सिंह ने कहा कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) वर्ष 2005 में यूपीए सरकार द्वारा लागू किया गया एक अधिकार-आधारित कानून है, जो प्रत्येक ग्रामीण परिवार को मजदूरी रोजगार की कानूनी गारंटी देता है। कानून के तहत राज्य सरकार को 15 दिनों के भीतर रोजगार उपलब्ध कराना अनिवार्य है, अन्यथा बेरोजगारी भत्ता देना पड़ता है। यही वैधानिक गारंटी मनरेगा की आत्मा और पहचान है।

उन्होंने कहा कि मनरेगा ग्रामीण आजीविका सुरक्षा की रीढ़ रहा है। यह योजना हर वर्ष 5 से 6 करोड़ परिवारों को रोजगार उपलब्ध कराती है, मजबूरी में होने वाले पलायन को कम करती है, ग्रामीण मजदूरी दर को बढ़ाती है और टिकाऊ सामुदायिक परिसंपत्तियों का निर्माण करती है। उन्होंने बताया कि मनरेगा की मांग-आधारित संरचना, सुनिश्चित मजदूरी और सीधे बैंक खातों में भुगतान की व्यवस्था से महिलाओं, दलितों, आदिवासियों और अन्य वंचित वर्गों को विशेष लाभ मिला है। कुल कार्यदिवसों में लगभग 60 प्रतिशत हिस्सेदारी महिलाओं की होना इसकी सामाजिक भूमिका को दर्शाता है।

चौधरी संतोख सिंह ने प्रस्तावित “विकसित भारत–गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम” पर कड़ा विरोध जताते हुए कहा कि यह मनरेगा के पूरे ढांचे को ध्वस्त करने वाला कदम है। इस प्रस्ताव के तहत काम की वैधानिक गारंटी समाप्त हो जाती है, निर्णय प्रक्रिया का केंद्रीकरण केंद्र सरकार के हाथों में चला जाता है और ग्राम सभाओं व पंचायतों की भूमिका कमजोर हो जाती है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा मजदूरी अंशदान को लगभग 90 प्रतिशत से घटाकर 60 प्रतिशत करना राज्यों और श्रमिकों पर सीधा वित्तीय बोझ डालने जैसा है।

उन्होंने चेतावनी दी कि बजट-सीमित आवंटन, कृषि के चरम मौसम में कार्य पर प्रतिबंध और मजदूरी सुरक्षा प्रावधानों को कमजोर करने से रोजगार में भारी कमी आएगी, श्रमिकों का शोषण बढ़ेगा और ग्रामीण संकट और गहराएगा। साथ ही, कार्यक्रम से महात्मा गांधी का नाम हटाना श्रम की गरिमा और ग्राम स्वराज जैसे मूल्यों को कमजोर करने का प्रयास है, जिन पर मनरेगा आधारित है।

अंत में चौधरी संतोख सिंह ने केंद्र सरकार से मांग की कि मनरेगा को उसके मूल अधिकार-आधारित स्वरूप में तत्काल पुनः बहाल किया जाए, ताकि ग्रामीण भारत को आर्थिक सुरक्षा और सम्मानजनक आजीविका मिलती रहे।

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Author: Bharat Sarathi

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