पार्श्वनाथ ग्रीन विले वेलफेयर एसोसिएशन की कथित गुंडागर्दी, रेजिडेंट की बिजली काटी

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

बिजली को बनाया दबाव और प्रतिशोध का हथियार, पुलिस हस्तक्षेप के बाद बहाल हुआ कनेक्शन

गुरुग्राम। गुरुग्राम में रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशनों (RWA) की मनमानी और दबंगई के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। कई सोसायटियों में RWA स्वयं को कानून, संविधान और प्रशासन से ऊपर समझने लगी हैं। ऐसा ही एक गंभीर मामला सेक्टर-48, सोहना रोड स्थित पार्श्वनाथ ग्रीन विले सोसायटी से सामने आया है, जहाँ एक रेजिडेंट की बिजली कथित रूप से बदले की भावना से काट दी गई।

सोसायटी निवासी समीर बंसल ने इस संबंध में बादशाहपुर थाना में रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत के अनुसार 5 जनवरी की शाम करीब 6 बजे सोसायटी के एस्टेट मैनेजर एस.के. यादव ने RWA प्रधान सुनील त्यागी व अन्य पदाधिकारियों के निर्देश पर बिना किसी वैध कारण के उनके मकान की बिजली चोरी-छुपे काट दी।

बिजली कटने के बाद समीर बंसल ने पुलिस से न्याय की गुहार लगाई। पुलिस हस्तक्षेप के बाद और घंटों की मानसिक व शारीरिक प्रताड़ना झेलने के पश्चात ही ग्रीन विले वेलफेयर एसोसिएशन ने बिजली आपूर्ति बहाल की।

समीर बंसल ने बताया कि संबंधित मकान सरकारी रिकॉर्ड में उनके और उनकी माताजी सुषमा बंसल के नाम दर्ज है और वे वर्ष 2009 से इसी सोसायटी में रह रहे हैं। उनकी माताजी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से ग्रसित हैं, जिनके लिए निर्बाध बिजली आपूर्ति अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके ऊपर बिजली बिल का कोई भी बकाया नहीं है।

शिकायतकर्ता का आरोप है कि ग्रीन विले वेलफेयर एसोसिएशन एक कथित फंड के नाम पर रेजिडेंट्स से लगभग 30 करोड़ रुपये की मांग कर रही है। इस फंड के खिलाफ उन्होंने खुलकर विरोध किया था। इससे पहले भी इस तरह के फंड के माध्यम से लाखों-करोड़ों रुपये वसूले जा चुके हैं। उनके अनुसार इसी विरोध के चलते RWA ने बदले की भावना से प्रेरित होकर उनके घर की बिजली काटी।

समीर बंसल ने कहा कि भारत का संविधान प्रत्येक नागरिक को सम्मानपूर्वक जीवन का अधिकार देता है और बिजली मूलभूत आवश्यक सेवाओं में शामिल है। किसी भी रेजिडेंट को इससे वंचित करना न केवल गैरकानूनी है बल्कि मौलिक अधिकारों का सीधा उल्लंघन भी है।

इस मामले में उन्होंने डीएचबीवीएन के एसडीओ राजेश कौशिक (सब-डिवीजन सोहना रोड) से भी शिकायत की। एसडीओ ने इस कृत्य को गैरकानूनी और असंवैधानिक बताते हुए स्पष्ट किया कि किसी भी रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन को बिजली काटने का कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने अपने जूनियर इंजीनियर के माध्यम से सोसायटी के एस्टेट मैनेजर को कड़े निर्देश जारी किए और भविष्य में ऐसी कार्रवाई न करने का आदेश दिया।

समीर बंसल ने दो टूक कहा कि जब तक दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं होती, वे चुप नहीं बैठेंगे। उनके अनुसार यह मामला केवल बिजली काटने का नहीं, बल्कि मानसिक व शारीरिक उत्पीड़न और नागरिक अधिकारों के हनन का गंभीर अपराध है।

इस घटना ने एक बार फिर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है—
क्या गुरुग्राम की RWA बिजली को ब्लैकमेलिंग और दबाव बनाने का हथियार बना चुकी हैं?
क्या रेजिडेंट्स से मनमाने फंड वसूलने के लिए आवश्यक सेवाओं को रोका जा रहा है?

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि सरकार को रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशनों की मनमानी पर तत्काल लगाम लगानी चाहिए और सिंगल मीटर सिस्टम की बजाय रेजिडेंट्स को सीधे डीएचबीवीएन से जोड़ा जाना चाहिए, ताकि RWA के कथित डर और ब्लैकमेलिंग पर प्रभावी रोक लग सके।

Bharat Sarathi
Author: Bharat Sarathi

Leave a Comment

और पढ़ें