मनरेगा खत्म कर वीबीजीरामजी लागू करना ग्रामीण विरोधी कदम: वेदप्रकाश विद्रोही

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कांग्रेस के देशव्यापी आंदोलन का किया स्वागत, पुरानी मनरेगा बहाल करने की मांग

चंडीगढ़/रेवाडी, 4 जनवरी 2026 | स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने कांग्रेस पार्टी द्वारा ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून मनरेगा को समाप्त कर उसके स्थान पर वीबीजीरामजी नामक कानून लागू किए जाने के विरोध में शुरू किए गए देशव्यापी आंदोलन का स्वागत करते हुए इसे समयोचित और आवश्यक कदम बताया है।

विद्रोही ने कहा कि वर्ष 2005 में कांग्रेस-यूपीए सरकार द्वारा मनरेगा कानून के माध्यम से ग्रामीण मजदूरों को उनके ही गांव में 100 दिन के रोजगार की गारंटी देकर एक ऐतिहासिक पहल की गई थी। लेकिन मोदी-भाजपा-संघ सरकार ने इस कानून को खत्म कर न केवल ग्रामीण मजदूरों की आजीविका पर प्रहार किया है, बल्कि ग्राम पंचायतों के अपनी जरूरतों के अनुसार विकास करने के अधिकार पर भी गंभीर चोट पहुंचाई है।

उन्होंने आरोप लगाया कि मनरेगा के स्थान पर लाया गया वीबीजीरामजी कानून ग्रामीण, मजदूर, पिछड़ा, दलित और आदिवासी विरोधी है। इस कानून ने ग्रामीण रोजगार गारंटी के अधिकार को कमजोर किया है और ग्राम पंचायतों की स्वायत्तता को बाधित कर दिया है, जिससे शोषित-वंचित वर्गों के लिए अपने ही गांव में मजदूरी कर जीवनयापन करना कठिन हो गया है।

विद्रोही ने कहा कि वीबीजीरामजी कानून में केन्द्र द्वारा रोजगार गारंटी के लिए 60 प्रतिशत केन्द्र और 40 प्रतिशत राज्य के वित्तीय हिस्से का प्रावधान कर दिया गया है, जिससे अधिकांश कर्ज में डूबी राज्य सरकारों, विशेषकर पूर्वोत्तर और पहाड़ी राज्यों के लिए इस योजना को चलाना लगभग असंभव हो जाएगा। यह प्रावधान गरीब मजदूरों की रोजी-रोटी पर सीधा हमला है।

उन्होंने इसे संविधान और संघीय ढांचे के खिलाफ बताते हुए कहा कि केन्द्र द्वारा एकतरफा वित्तीय ढांचा थोपना राज्यों के अधिकारों की अवहेलना है।

वेदप्रकाश विद्रोही ने स्पष्ट कहा कि ग्रामीण मजदूरों को सम्मानजनक जीवन और समग्र ग्रामीण विकास के लिए पुरानी मनरेगा योजना को उसी रूप में पुनः लागू करना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने देश के सभी नागरिकों से कांग्रेस के आंदोलन को समर्थन देने की अपील करते हुए कहा कि इससे ग्रामीण मजदूरों की रोजी-रोटी और ग्राम पंचायतों के विकास के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित हो सकेगी।

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Author: Bharat Sarathi

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