लाडो लक्ष्मी योजना: चुनावी वादों के नाम पर महिलाओं से सुनियोजित धोखाधड़ी

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— पर्ल चौधरी वरिष्ठ कांग्रेस नेत्री

हरियाणा की भाजपा सरकार द्वारा लाडो लक्ष्मी योजना में किए जा रहे लगातार संशोधन इस बात का स्पष्ट प्रमाण हैं कि यह योजना महिला सशक्तिकरण का माध्यम नहीं, बल्कि चुनावी घोषणापत्रों से पीछे हटने की एक सुविचारित रणनीति है।

जिस योजना को 2024 के विधानसभा चुनाव में “हरियाणा की सभी महिलाओं” के लिए बताया गया था, वही आज शर्तों, कटौतियों और बहिष्करण के जाल में बदल चुकी है।

₹2100 का वादा, 11 महीने की चुप्पी और अधिकारों की चोरी

भाजपा ने अपने संकल्प पत्र में सबसे पहला और प्रमुख वादा किया था—
हर महिला को ₹2100 प्रतिमाह।
इस वादे में न उम्र की शर्त थी, न आय सीमा और न ही कोई सामाजिक या शैक्षणिक बंधन। यह वादा लगभग एक करोड़ महिलाओं से किया गया।

लेकिन सरकार बनने के बाद 11 महीनों तक योजना लागू नहीं की गई।
इस देरी का सीधा अर्थ है कि हर महिला से ₹23,100 छीने गए। यह केवल प्रशासनिक देरी नहीं, बल्कि महिलाओं के अधिकारों की खुली चोरी है।

अधिसूचना के साथ बदला चरित्र

15 सितंबर 2025 को जब योजना अधिसूचित हुई, तो उसका स्वरूप पूरी तरह बदल चुका था—

न्यूनतम उम्र 23 वर्ष

वार्षिक आय सीमा ₹1 लाख

हरियाणा से बाहर की बहुओं के लिए 15 साल की निवास शर्त

अन्य सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की लाभार्थी महिलाओं को बाहर

परिणाम यह हुआ कि संभावित लाभार्थियों की संख्या एक करोड़ से घटकर पहले 20 लाख और फिर वास्तविक रूप से केवल 7 लाख रह गई—
यानी हरियाणा की कुल महिला आबादी का सिर्फ़ 7 प्रतिशत।

₹2100 भी पूरे नहीं—भविष्य के चुनावों के लिए आरडी जाल

अब सरकार ने ₹2100 की राशि को भी दो हिस्सों में बाँट दिया है।
आधी राशि तुरंत दी जाएगी और शेष ₹1000 सरकार-चालित आरडी खाते में जमा होंगे, जो 2029 के आसपास परिपक्व होंगे।

यह साफ़ दर्शाता है कि सरकार महिलाओं की मौजूदा ज़रूरतों से ज़्यादा भविष्य के चुनावों को ध्यान में रखकर योजनाएँ चला रही है।

80 प्रतिशत अंक: अमानवीय और हास्यास्पद शर्त

सबसे अधिक आपत्तिजनक और अमानवीय शर्त है—
80 प्रतिशत अंकों की अनिवार्यता।

सरकार का फरमान है कि जिन महिलाओं के बच्चे सरकारी स्कूलों में पढ़ते हुए 10वीं या 12वीं में 80 प्रतिशत अंक लाएँगे, उन्हें ही ₹1.8 लाख तक की आय सीमा में योजना का लाभ मिलेगा।

मैं सरकार से सीधा सवाल पूछना चाहती हूँ—

क्या यह रिवर्स स्कॉलरशिप नहीं है?

क्या गरीब बच्चों पर 80 प्रतिशत अंक लाने का दबाव डालकर माँ का अधिकार छीना जाएगा?

हरियाणा में कितने विधायक, सांसद और वरिष्ठ अधिकारी हैं जिनके बच्चों ने 80 प्रतिशत से अधिक अंक हासिल किए हैं?

क्या सरकार ऐसे जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के लाखों रुपये के वेतन और पेंशन में कटौती करेगी, जिनके बच्चे इस कसौटी पर खरे नहीं उतरते?

अगर नहीं, तो फिर ₹2100 के लिए यह शर्त सिर्फ़ गरीब परिवार की माताओं पर ही क्यों?

मेधावी बच्चों के नाम पर महिलाओं को दंड

यदि सरकार को वास्तव में मेधावी छात्रों की चिंता है, तो उसे चाहिए कि वह अलग से ₹2100 प्रतिमाह की मेरिट स्कॉलरशिप शुरू करे।
लेकिन सामाजिक सुरक्षा को शैक्षणिक अंकों से जोड़कर महिलाओं को दंडित करना नीतिगत क्रूरता है।

जब शिक्षा व्यवस्था खुद बदहाल हो

यह शर्त तब और भी अमानवीय हो जाती है जब हम सरकारी शिक्षा की वास्तविक स्थिति देखते हैं—

सरकारी स्कूलों की संख्या लगातार घट रही है इस कारण 10वीं और 12वीं की पढ़ाई के लिए पटौदी विधानसभा की बेटियों को अपने गाँव से दूसरे गाँव के सरकारी स्कूल में जाना पड़ता है यातायात के साधनों की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण और गिरती कानून व्यवस्था के कारण कई परिवार अपनी बेटियों को दूसरे गाँव पढ़ने के लिए भेजने से कतराते हैं

शिक्षकों की भारी कमी है

पढ़ाई का स्तर चिंताजनक रूप से गिरा हुआ

ऐसी व्यवस्था में 80 प्रतिशत अंकों की अपेक्षा करना सामाजिक अन्याय है।

‘परीक्षा पर चर्चा’ बनाम हकीकत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2018 से परीक्षा पर चर्चा में परीक्षा को जीवन-मरण का प्रश्न न बनाने की बात करते हैं, वो कहते हैं कि परीक्षा एक यात्रा है त्यौहार है जिसका सुखद अनुभव करना चाहिए,
लेकिन कल के बदलाव के बाद लाडो लक्ष्मी योजना में परीक्षा को गरीब बच्चों और उनकी माताओं के लिए जीवन-मरण की शर्त बना दिया गया है।

खोखली नीयत और बढ़ता कर्ज़

सच्चाई यह है कि यह योजना भाजपा ने कांग्रेस के मेनिफेस्टो से ली, लेकिन हर दूसरी योजना की तरह इसे भी खोखली नीयत से लागू किया।

2014 में हरियाणा पर कर्ज़: ₹70,000 करोड़

आज कर्ज़: ₹3,17,000 करोड़

विकास नगण्य है, लेकिन खर्च का बड़ा हिस्सा विज्ञापन और प्रचार पर हो रहा है।
इसीलिए सरकार शर्तों की आड़ में गरीब परिवार की महिलाओं को उनके अधिकार से वंचित कर रही है।

कांग्रेस पार्टी इस अन्याय के खिलाफ चुप नहीं रहेगी।
महिलाओं के सम्मान और अधिकारों की इस लड़ाई में हम हरियाणा की भाजपा सरकार को इस तुगलकी और नायाब फरमान को वापस लेने के लिए मजबूर करेंगे।

Bharat Sarathi
Author: Bharat Sarathi

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