रेवाडी/चंडीगढ़, 1 जनवरी 2026 – स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने नववर्ष 2026 पर अपने पहले वक्तव्य में कहा कि देश और प्रदेश के सामने इस वर्ष साम्प्रदायिक उन्माद और नफरत की जहरीली राजनीति सबसे बड़ी चुनौती के रूप में खड़ी होगी, जिसका मुकाबला सभी नागरिकों को एकजुट होकर करना होगा।
विद्रोही ने आरोप लगाया कि केन्द्र की मोदी–भाजपा–संघ सरकार सत्ता में बने रहने के लिए समाज में जानबूझकर नफरत और विभाजन की राजनीति को बढ़ावा दे रही है, जिससे भारतीय समाज में भाई-भाई के बीच द्वेष पैदा हो रहा है। उन्होंने कहा कि यह प्रवृत्ति किसी भी स्वस्थ लोकतांत्रिक और सामाजिक व्यवस्था के लिए घातक है।
उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि चुनाव आयोग के साथ मिलकर सत्ता का दुरुपयोग, वोट चोरी और जनादेश पर डाका डालने की कोशिशें लोकतंत्र को बेमानी बना रही हैं। इसके समानांतर साम्प्रदायिक उन्माद फैलाकर जनता का ध्यान महंगाई, बेरोजगारी और आर्थिक विषमता जैसे वास्तविक मुद्दों से हटाया जा रहा है।
वेदप्रकाश विद्रोही ने कहा कि देश में महंगाई, बेरोजगारी, गरीबी और आर्थिक असमानता लगातार बढ़ रही है, जिससे आमजन का जीवन कठिन होता जा रहा है। इसके समाधान की बजाय सरकार देश की संपत्तियों को सुनियोजित ढंग से अडानी–अम्बानी जैसे ‘मोदी मित्रों’ को सौंपकर एकाधिकारवादी व्यवस्था को बढ़ावा दे रही है।
उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे लोकतंत्र और संविधान पर हो रहे हमलों के खिलाफ बड़ा जन-आंदोलन खड़ा करें, ताकि भारत में एकाधिकारवादी व्यवस्था कायम न हो और लोकतंत्र व संविधान की रक्षा सुनिश्चित की जा सके।









