अहीरवाल को 11 साल में क्या मिला–क्या खोया, नववर्ष में आत्मविश्लेषण करें: वेदप्रकाश विद्रोही

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11 साल के एकतरफा समर्थन के बावजूद विकास से वंचित अहीरवाल, नववर्ष 2026 में आत्ममंथन की अपील

रेवाडी/गुरुग्राम, 31 दिसंबर 2025 | स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के दो साल के कार्यकाल पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि अहीरवाल क्षेत्र में विकास और सामाजिक सरोकारों के मोर्चे पर कोई ठोस परिवर्तन नहीं आया है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार की उपेक्षापूर्ण नीति यथावत बनी हुई है।

विद्रोही ने कहा कि यह नहीं भुलाया जाना चाहिए कि पिछले 11 वर्षों से हरियाणा में भाजपा की ही सरकार है। यदि सरकार कुछ उपलब्धियों का श्रेय लेती है, तो कमियों और नाकामियों की जवाबदेही भी उसी की बनती है। आरोप लगाया कि कांग्रेस शासनकाल की विकास परियोजनाओं का श्रेय लेने में भाजपा आगे रहती है, लेकिन जब जवाबदेही का समय आता है तो विफलताओं का ठीकरा पिछली सरकारों पर फोड़ दिया जाता है।

उन्होंने बताया कि अहीरवाल क्षेत्र ने पिछले तीन लोकसभा और तीन विधानसभा चुनावों में भाजपा को एकतरफा समर्थन दिया है और हरियाणा में भाजपा सरकार तीनों बार अहीरवाल के दम पर बनी। इसके बावजूद, 11 वर्षों में इस क्षेत्र को अपेक्षित विकास और जनसरोकारों का लाभ नहीं मिला। विद्रोही के अनुसार, “11 साल किसी भी क्षेत्र के विकास के लिए पर्याप्त समय होता है, लेकिन अहीरवाल में स्थिति इसके उलट है।”

नववर्ष 2026 के आगमन पर उन्होंने अहीरवाल के नागरिकों से गंभीर आत्ममंथन करने की अपील की—कि पिछले 11 वर्षों में भाजपा को दिए गए एकतरफा समर्थन से क्षेत्र ने क्या पाया और क्या खोया। उनका कहना था कि जब तक जनता स्वयं इसका हिसाब-किताब नहीं करेगी, तब तक क्षेत्र को उसका वाजिब हक नहीं मिलेगा। उन्होंने दावा किया कि अहीरवाल ने भाजपा को जितना दिया है, उसके बदले में क्षेत्र को 10 प्रतिशत भी नहीं मिला।

विद्रोही ने आरोप लगाया कि तीसरी बार सरकार बनने के बाद अहीरवाल आए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने केवल जुमलेबाजी की। उनके व्यवहार और बयानों से यह संकेत नहीं मिला कि भविष्य में अहीरवाल को उसका अधिकार मिलेगा। विधानसभा चुनावों के बाद नवनिर्वाचित विधायकों और मंत्रियों के बड़े-बड़े दावों के बावजूद, पिछले दो वर्षों में प्रशासन पर उनकी बातों का कोई असर नहीं दिखा। प्रशासन का उपेक्षापूर्ण रवैया जस का तस बना हुआ है।

उन्होंने कहा कि अहीरवाल में विकास की रफ्तार कछुआ गति से चल रही है और अपराध की घटनाएं कम होने के बजाय बढ़ रही हैं। सवाल उठाते हुए विद्रोही ने कहा कि जब एकतरफा समर्थन के बावजूद विकास नहीं मिल रहा, तो फिर भाजपा का पिछलग्गू बनकर लोग अपने ही पैरों पर कुल्हाड़ी क्यों मार रहे हैं? उन्होंने आरोप लगाया कि क्षेत्र से निर्वाचित भाजपा सांसद और विधायक कथनी-करनी में अंतर रखते हुए विकास के बजाय निजी हितों को प्राथमिकता दे रहे हैं।

अंत में विद्रोही ने कहा कि जिस दिन अहीरवाल के लोग आत्मविश्लेषण कर अंधभक्ति छोड़कर अपने हितों और जनसरोकारों के प्रति सजग होंगे, उसी दिन इस क्षेत्र को विकास में समान भागीदारी मिलेगी। अन्यथा अहीरवाल को इसी तरह भेदभाव का शिकार होना पड़ेगा।

Bharat Sarathi
Author: Bharat Sarathi

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