राजस्थान के देवमाली और भगवान देवनारायण की आध्यात्मिक-सांस्कृतिक विरासत पर आधारित कृति को मिला राष्ट्रीय सम्मान
हरियाणा की लेखिकाओं ने एक बार फिर साहित्य जगत में रचा इतिहास
कुरुक्षेत्र | प्रमोद कौशिक | 29 दिसंबर – गांव ढाणी पाल, हांसी (हरियाणा) में जन्मी प्रतिष्ठित लेखिकाएँ डॉ. संजीव कुमारी एवं शिखा कुमारी का संयुक्त साहित्यिक प्रयास एक बार फिर देश की प्रतिष्ठित इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज होकर इतिहास रच गया है। सह-लेखक के रूप में डॉ. राकेश छोकर की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही।
लेखिकाओं द्वारा रचित पुस्तक ‘देवमाली : आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक सरोकार’ को इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में विशेष उपलब्धि के रूप में शामिल किया गया है। यह पुस्तक राजस्थान के ब्यावर क्षेत्र स्थित विश्वविख्यात गांव देवमाली तथा वहां के आराध्य देव भगवान देवनारायण के आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और लोकपरंपरागत महत्व को समर्पित है। पुस्तक का विमोचन दिसंबर 2025 में धर्मनगरी कुरुक्षेत्र में किया गया था।
डॉ. संजीव कुमारी और शिखा कुमारी इससे पूर्व भी ‘विष्णु अवतार श्री देवनारायण’ तथा ‘श्री देवनारायण फड़ कथा’ जैसी महत्वपूर्ण कृतियाँ रच चुकी हैं, जिन्हें भी इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में स्थान मिल चुका है।
उल्लेखनीय है कि डॉ. संजीव कुमारी की अब तक प्रकाशित 15 पुस्तकों में से 6 पुस्तकें इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज हो चुकी हैं, जबकि शिखा कुमारी की 5 पुस्तकों में से 2 पुस्तकें इस प्रतिष्ठित सूची का हिस्सा बन चुकी हैं—जो अपने आप में एक दुर्लभ उपलब्धि है।
दोनों लेखिकाओं ने हिंदी, हरियाणवी, राजस्थानी, ब्रज एवं पंजाबी भाषाओं में विविध विधाओं में सृजन किया है। उनकी कृति ‘झड़ते पत्ते’ को हरियाणा साहित्य अकादमी, पंचकूला द्वारा श्रेष्ठ कृति के रूप में सम्मानित किया जा चुका है, वहीं अन्य पुस्तकों को भी अनेक गैर-सरकारी साहित्यिक सम्मान प्राप्त हुए हैं।
लेखन के साथ-साथ अन्य क्षेत्रों में भी अपनी प्रतिभा का परचम लहराने वाली इन साहित्यकार बहनों की इस ऐतिहासिक उपलब्धि से पूरे क्षेत्र में हर्ष का माहौल है। साहित्य, शिक्षा और सांस्कृतिक जगत से जुड़े गणमान्य लोगों द्वारा उन्हें लगातार बधाइयाँ दी जा रही हैं।








