साल में दूसरी बार रेल किराया बढ़ाकर सरकार ने आम जनता पर डाला बोझ

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महंगाई व बेरोज़गारी से जूझ रहे युवाओं के साथ अन्याय — AIDYO

गुड़गांव | 28 दिसंबर 2025 – ऑल इंडिया डेमोक्रेटिक यूथ ऑर्गेनाइजेशन (AIDYO) ने वर्ष 2025 में दूसरी बार रेल किराए में की गई बढ़ोतरी की कड़ी निंदा करते हुए इसे आम जनता, विशेषकर बेरोज़गार युवाओं और गरीब यात्रियों पर सीधा हमला बताया है। संगठन ने जनता से इस जनविरोधी निर्णय के खिलाफ संगठित विरोध की अपील की है।

AIDYO के अखिल भारतीय महासचिव अमरजीत कुमार ने जारी बयान में कहा कि पहले से ही महंगाई, बेरोज़गारी और सामाजिक-आर्थिक संकट से जूझ रही जनता पर सरकार ने एक बार फिर असंवेदनशीलता दिखाते हुए रेल किराया बढ़ाकर भारी बोझ लाद दिया है।

उन्होंने कहा कि एक ओर पिछले वर्षों में ट्रेनों से साधारण कोचों की संख्या लगातार घटाई गई, वहीं दूसरी ओर वातानुकूलित कोचों और वंदे भारत जैसी महंगी ट्रेनों को बढ़ावा दिया जा रहा है। परिणामस्वरूप गरीब प्रवासी मजदूरों और परीक्षा देने जाने वाले बेरोज़गार युवाओं को मेल-एक्सप्रेस ट्रेनों में अमानवीय परिस्थितियों में, यहां तक कि शौचालयों तक में यात्रा करने को मजबूर होना पड़ रहा है, जबकि महंगी ट्रेनों की सीटें खाली जा रही हैं।

अमरजीत कुमार ने आरोप लगाया कि किराया वसूलने के बावजूद यात्रियों को सुविधा के नाम पर लेट-लतीफ ट्रेनें, अव्यवस्थित सेवाएं और बढ़ती रेल दुर्घटनाएं मिल रही हैं। परीक्षार्थियों की परीक्षाएं छूट रही हैं, लेकिन सरकार यात्रियों की समय पर और सुरक्षित यात्रा की कोई जवाबदेही लेने को तैयार नहीं है।

उन्होंने चेतावनी दी कि रेलवे सुविधाओं के तेज़ी से हो रहे निजीकरण से भविष्य में यात्रियों की स्थिति और भी बदतर होगी, जैसा हाल के वर्षों में हवाई यात्रा के क्षेत्र में देखने को मिला है, जहां निजी कंपनियां संकट के समय मनमाना किराया वसूलती हैं।

AIDYO ने सवाल उठाया कि जो सरकार खुद को गरीबों की हितैषी बताकर वोट मांगती है और “सबका साथ, सबका विकास” का नारा देती है, क्या उसे वास्तव में गरीबों की कोई चिंता है?

संगठन ने सरकार से यात्री किराया वृद्धि तत्काल वापस लेने, यात्री सुविधाओं और सुरक्षा को सुनिश्चित करने, ट्रेनों के समय पर संचालन की गारंटी देने, देरी होने पर मुआवजा देने तथा रेलवे के निजीकरण की नीति रद्द करने की मांग की है। इसके साथ ही देश की जनता से इन मांगों के समर्थन में सशक्त जनआंदोलन खड़ा करने की अपील की गई है।

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Author: Bharat Sarathi

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