अरावली से छेड़छाड़ पड़ेगी भारीः भुगतने होंगे गंभीर परिणाम-चौधरी संतोख सिंह

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अरावली पर्वत श्रृंखला को केवल 100 मीटर ऊँचाई के मानदंड तक सीमित करना वैज्ञानिक, पर्यावरण एवं संवैधानिक दृष्टि से गंभीर रूप से त्रुटिपूर्ण है

गुरुग्राम, 24 दिसंबर 2025। संयुक्त किसान मोर्चा गुरुग्राम के अध्यक्ष एवं जिला बार एसोसिएशन गुरुग्राम के पूर्व प्रधान चौधरी संतोख सिंह ने अरावली पर्वत श्रृंखला को केवल 100 मीटर ऊँचाई के मानदंड तक सीमित करने के प्रस्ताव पर गहरी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि यह परिभाषा वैज्ञानिक, पर्यावरण एवं संवैधानिक दृष्टि से गंभीर रूप से त्रुटिपूर्ण है।

चौधरी संतोख सिंह ने कहा कि अरावली पर्वत श्रृंखला भारत की सबसे प्राचीन और संवेदनशील प्राकृतिक प्रणालियों में से एक है, जो दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और गुजरात तक फैली हुई है। यह जल संरक्षण, जलवायु संतुलन, जैव-विविधता की रक्षा तथा मानव जीवन की सुरक्षा में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि अरावली केवल ऊँचे पहाड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक सतत जियोलॉजिकल और इकोलॉजिकल सिस्टम है, जिसमें छोटी पहाड़ियाँ, वन क्षेत्र, जलस्रोत, भूजल रिचार्ज ज़ोन और वन्यजीव कॉरिडोर शामिल हैं। केवल ऊँचाई के आधार पर इसकी परिभाषा तय करना इसके वास्तविक स्वरूप और कार्यों की अनदेखी है।

चौधरी संतोख सिंह ने स्मरण कराया कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने वर्ष 2002 में अरावली को पहाड़ियों की श्रृंखला मानते हुए खनन पर रोक लगाई थी। यह निर्णय इसकी पारिस्थितिक अखंडता के आधार पर था, न कि किसी मनमाने ऊँचाई मानक पर।

उन्होंने चेतावनी दी कि नई संकीर्ण व्याख्या से खनन, जंगलों की कटाई और अनियंत्रित निर्माण को बढ़ावा मिलेगा, जिसके परिणामस्वरूप जल संकट, प्रदूषण, मरुस्थलीकरण और जैव-विविधता को अपूरणीय क्षति पहुँचेगी।

उन्होंने सरकार से मांग की कि अरावली पर्वत श्रृंखला को केवल 100 मीटर ऊँचाई आधारित परिभाषा में सीमित करने के प्रस्ताव को तत्काल अस्वीकार किया जाए और इसकी समग्र, वैज्ञानिक एवं पारिस्थितिक पहचान को यथावत बनाए रखा जाए।

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Author: Bharat Sarathi

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