संसद से विधानसभा तक लोकतांत्रिक मर्यादाओं के हनन का आरोप, वेदप्रकाश विद्रोही का तीखा हमला
अविश्वास प्रस्ताव से लेकर सदन संचालन तक, भाजपा पर फासीवादी एजेंडे का आरोप
रेवाडी/चंडीगढ़, 21 दिसंबर 2025 – स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने मोदी-भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि केंद्र सरकार सुनियोजित तरीके से भारत के लोकतंत्र और उसकी लोकतांत्रिक परंपराओं को कमजोर कर देश पर “संघी फासीवाद” थोपने का काम कर रही है। उन्होंने कहा कि इसी एजेंडे के तहत संसद और विधानसभाओं की कार्यवाही का संचालन लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप न होकर केवल भाजपा सरकार के पक्ष को सामने लाने के लिए किया जा रहा है।
विद्रोही ने कहा कि संसद और विधानसभा, जिन्हें कभी लोकतंत्र के मंदिर माना जाता था, आज संघी धर्मशालाओं में तब्दील होते जा रहे हैं। पीठासीन अधिकारी संवैधानिक मर्यादाओं को ताक पर रखकर संघी एजेंट की तरह सदनों का संचालन कर रहे हैं और योजनाबद्ध ढंग से संसदीय परंपराओं को समाप्त कर हिटलरशाही को बढ़ावा दिया जा रहा है।
उन्होंने चुनाव आयोग पर भी तीखा हमला बोलते हुए कहा कि लोकतंत्र का प्रहरी कहलाने वाला चुनाव आयोग अब वोट चोरी के माध्यम से जनादेश का अपहरण करने वाला गिरोह बन गया है। वहीं न्यायपालिका पर आरोप लगाते हुए विद्रोही ने कहा कि वह संविधान की लक्ष्मण रेखा के अनुसार फैसले देने की बजाय भाजपा-संघ के इशारों पर सरकार की इच्छानुसार न्याय देने लगी है। लोकतंत्र का चौथा स्तंभ मीडिया भी “कोमा” में चला गया है।
विद्रोही ने कहा कि जिस दिशा में भारत का लोकतंत्र आगे बढ़ रहा है, वह भविष्य के लिए बेहद निराशाजनक संकेत है। यदि आम नागरिकों ने समय रहते सार्थक पहल कर लोकतंत्र के पुराने गौरव को लौटाने और लोकतांत्रिक परंपराओं की रक्षा के लिए कदम नहीं उठाए, तो इसका खामियाजा आम जनता को ही भुगतना पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि आज स्थिति यह है कि संसद और विधानसभा में जब विपक्ष जनता की आवाज उठाता है, तो भाजपा उसे देशद्रोही कदम करार देती है। लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप कांग्रेस और विपक्ष द्वारा उठाए गए मुद्दों को संसद की कार्यवाही में बाधा बताकर विपक्ष को बदनाम किया जाता है।
विद्रोही ने कहा कि अब तो हालात इतने खराब हो गए हैं कि विपक्ष द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर भी व्यर्थ के सवाल खड़े किए जाते हैं और यह पूछा जाता है कि उस पर किस नेता के हस्ताक्षर हैं और किसके नहीं। उन्होंने हरियाणा विधानसभा में कांग्रेस द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर मुख्यमंत्री की सदन में दी गई प्रतिक्रिया को लोकतंत्र के साथ “क्रूर मजाक” करार दिया।
उन्होंने सवाल उठाया कि किसी भी अविश्वास प्रस्ताव पर किस नेता के हस्ताक्षर हैं या नहीं, यह पूछने का अधिकार मुख्यमंत्री को कैसे हो सकता है। विद्रोही ने चेतावनी दी कि यदि भाजपा इसी तरह सभी लोकतांत्रिक सीमाओं का उल्लंघन कर भारत के लोकतंत्र को संघी फासीवाद में बदलती रही और नागरिकों ने इस पर ध्यान नहीं दिया, तो आने वाले समय में भारत का लोकतंत्र केवल कागजों तक सिमट कर रह जाएगा।






