राइट टू सर्विस कमीशन ने महेंद्रगढ़ नगरपालिका की लापरवाही पर लिया संज्ञान

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स्ट्रीट लाइट मरम्मत में देरी, आयोग ने जेई को किया दंडित

चंडीगढ़, 12 दिसंबर — हरियाणा राइट टू सर्विस कमीशन ने महेंद्रगढ़ नगर परिषद क्षेत्र में स्ट्रीट लाइटों की मरम्मत में हुई देरी और संबंधित अधिकारियों की लापरवाही पर गंभीर संज्ञान लिया है। आयोग के प्रवक्ता ने बताया कि मूल शिकायत 24 मार्च, 2025 को प्राप्त होने के बावजूद नगरपालिका समिति की ओर से आवश्यक लिखित निर्देश लंबे समय तक जारी नहीं किए गए। वारंटी शर्तों के अनुसार एजेंसी को सात दिनों के भीतर लाइटों की मरम्मत या प्रतिस्थापन सुनिश्चित करना अनिवार्य था, किंतु समिति द्वारा पहला लिखित ईमेल 30 अगस्त, 2025 को भेजा गया, जो न केवल चार महीने की देरी दर्शाता है बल्कि आयोग के 30 जुलाई, 2025 के अंतरिम आदेशों के लगभग एक माह बाद की गई कार्रवाई भी है। इस विलंब के परिणामस्वरूप एजेंसी को अनुचित आर्थिक लाभ मिला और उपभोक्ताओं को अनावश्यक असुविधा झेलनी पड़ी।

एसजीआरए–कम–जिला नगर आयुक्त नारनौल द्वारा भेजी गई 29 सितंबर, 2025 की रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया कि लगभग 200 स्ट्रीट लाइटें खराब पाई गईं, परंतु नगरपालिका समिति मात्र 45 लाइटें ही खंभों से हटाकर मरम्मत हेतु भेज सकी। इनमें से 22 लाइटें ठीक कर पुनः स्थापित की गईं, जबकि 23 लाइटें एसपीडी (सर्ज प्रोटेक्शन डिवाइस) जलने तथा अन्य पुर्ज़ों की समस्या के कारण 29 सितंबर, 2025 तक लंबित रहीं। समिति द्वारा सप्लायर को बार-बार अनुपालन न करने पर भी किसी प्रकार का दंड न लगाया जाना अत्यंत गंभीर चूक मानी गई। सुनवाई के दौरान डीओ, एमई तथा नगर परिषद मानेसर में तैनात अधिकारी ने स्वीकार किया कि एजेंसी सामान्यतः सामूहिक (बल्क) रूप में मरम्मत करती है और 1–2 खराब लाइटों पर तुरंत कार्रवाई नहीं करती, जिसके कारण महेंद्रगढ़ क्षेत्र में भी देरी हुई। लिंक अधिकारी ने भी स्वीकार किया कि निर्धारित समय सीमा के भीतर आरटीएस सेवा का पालन न करना स्पष्ट रूप से गंभीर प्रशासनिक त्रुटि है तथा यह भी संभव है कि अभी भी कुछ लाइटें खराब स्थिति में हों।

आयोग ने यह भी नोट किया कि शहरी स्थानीय निकाय निदेशालय ने अपने 30 सितंबर, 2025 के उत्तर में स्पष्ट किया कि वारंटी शर्तों का प्रवर्तन तथा दंड लगाना नगरपालिका समिति की जिम्मेदारी थी, परंतु महेंद्रगढ़ नगरपालिका से किसी प्रकार का रिकॉर्ड, कार्रवाई या दंड संबंधी पत्राचार प्राप्त नहीं हुआ, जब तक कि आयोग ने स्वयं विवरण नहीं मांगा। सामग्री लागत, एसपीडी जलने और वारंटी दायित्वों को लागू न करने के कारण सप्लायर को महीनों तक आर्थिक लाभ मिलता रहा। यह भी स्थापित हुआ कि मरम्मत कार्य सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत नहीं, बल्कि आयोग के निरंतर हस्तक्षेप के बाद ही आगे बढ़ पाया।

उपलब्ध तथ्यों, स्वीकारोक्तियाँ तथा रिकॉर्ड पर प्रदर्शित विलंब को ध्यान में रखते हुए आयोग ने संबंधित कनिष्ठ अभियंता (जेई) के विरुद्ध 20,000 रुपये का दंड निर्धारित किया है, जिसे उनके वेतन में से काटकर राज्य कोष में जमा कराया जाएगा। एसजीआरए–कम–जिला नगर आयुक्त, महेंद्रगढ़ को निर्देश दिए गए हैं कि अनुपालन रिपोर्ट चालान प्रतियों सहित आयोग को भेजी जाए।

साथ ही, अपील अवधि के दौरान प्रकरण जिन अधिकारियों के समक्ष लंबित रहा, उनके विरुद्ध आयोग ने इस चरण पर दंडात्मक कार्रवाई न करते हुए कड़ी चेतावनी जारी की है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि उनके नाम इस प्रकरण के साथ अपने अभिलेख में दर्ज किए जा रहे हैं तथा भविष्य में किसी भी स्तर पर ऐसी लापरवाही पाए जाने पर अधिनियम की धारा 17(1)(द) के अंतर्गत विभागीय कार्रवाई की संस्तुति की जाएगी।

आयोग ने कहा है कि यह प्रकरण स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि समयबद्ध कार्रवाई, लिखित आदेशों का पालन और वारंटी शर्तों का प्रभावी प्रवर्तन अनिवार्य है। आयोग ने सभी स्थानीय निकायों को चेतावनी देते हुए कहा है कि भविष्य में इस प्रकार की लापरवाही दोहराए जाने पर कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

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Author: Bharat Sarathi

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