“कार्यकर्ता हतोत्साहित, नेता भ्रमित” — गुरुग्राम में राजनीतिक दलों की निष्क्रियता पर समर्थकों का तीखा वार
गुरुग्राम, हरियाणा — गुरुग्राम जिले में कांग्रेस और भाजपा की संगठनात्मक स्थिति को लेकर कांग्रेस समर्थकों व जागरूक नागरिकों ने गहरी चिंता और तीखा असंतोष व्यक्त किया है। उनका कहना है कि दोनों प्रमुख दलों की आंतरिक कलह, निष्क्रियता और कमजोर संगठनात्मक ढांचा लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं तथा जनता के बुनियादी मुद्दों को बुरी तरह प्रभावित कर रहा है।
कांग्रेस संगठन को लेकर बढ़ती नाराज़गी: संवादहीनता से कार्यकर्ता हतोत्साहित
कांग्रेस समर्थकों का आरोप है कि अगस्त 2025 में नए जिला अध्यक्ष के चयन के बाद से गुरुग्राम कांग्रेस की सक्रियता लगभग ठप पड़ चुकी है।
संगठन से जुड़े मुख्य आरोप इस प्रकार हैं—
- जिला कांग्रेस कार्यालय अक्सर बंद रहता है।
- कार्यक्रमों की सूचना न समय पर दी जाती है, न प्रभावी ढंग से साझा होती है।
- पदाधिकारी कार्यकर्ताओं के फोन व संदेश तक अनदेखे कर देते हैं।
- 6 दिसंबर 2025 को डॉ. भीमराव अंबेडकर जी के महापरिनिर्वाण दिवस कार्यक्रम में केवल 30–35 कार्यकर्ता ही उपस्थित रहे।
समर्थकों का कहना है कि अगस्त 2025 से आज तक किसी भी कार्यक्रम में 50 कार्यकर्ता तक नहीं जुट पाए, जो यह दर्शाता है कि संगठन पूरी तरह निष्क्रिय होता जा रहा है।
गुटबाज़ी और पक्षपातपूर्ण नियुक्तियों ने बढ़ाई सिरदर्दी
समर्थकों ने आरोप लगाया कि प्रदेश स्तर पर बढ़ती गुटबाज़ी का सीधा असर गुरुग्राम में दिखाई दे रहा है—
- नज़दीकी लोगों को ही पदों पर बिठाने की होड़
- सिफ़ारिश और निजी समीकरणों के आधार पर पदों का वितरण
- कई पदाधिकारियों पर भाजपा नेताओं से नज़दीकी के आरोप
- नगर निगम चुनावों में टिकट वितरण को लेकर भारी विवाद
उनका कहना है कि इस रवैये से समर्पित और जुझारू कार्यकर्ताओं को दरकिनार किया जा रहा है, जिससे कांग्रेस का आधार कमजोर हो रहा है और जमीनी संगठन लगभग दम तोड़ने की कगार पर है।
भाजपा भी गुटबाज़ी की चपेट में: “एकजुटता गायब, खेमेबाज़ी हावी”
कांग्रेस समर्थकों की मानें तो गुरुग्राम भाजपा की हालत भी इससे अलग नहीं—
- एक गुट पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल का
- दूसरा मंत्री नायब सिंह का
- तीसरा केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह का
- चौथा राव नरबीर सिंह का
समर्थकों का कहना है कि कार्यक्रम का नेता बदला नहीं कि भीड़ भी बदल जाती है।
हाल ही में मंत्री आरती राव के दौरे में भी राव नरबीर गुट का लगभग पूरा अभाव चर्चा का विषय बना रहा।
उनका आरोप है कि भाजपा में आज जनता और असली कार्यकर्ता कम, गुटबाज़ी और स्वार्थ की राजनीति अधिक दिखाई देती है, जिससे जनता के मुद्दे पीछे छूट रहे हैं।
“जब राजनीति स्वार्थ की हो जाए, तो जनता सबसे बड़ा नुकसान झेलती है”
समर्थकों ने कहा कि गुरुग्राम में—
- भाजपा के विभिन्न गुट आपसी खींचतान में उलझे हुए हैं
- कांग्रेस के कुछ नेता भाजपा नेताओं के साथ मंच साझा कर “समीकरण” साधने में व्यस्त रहते हैं
- सरकार की आलोचना तो होती है, पर जमीनी मुद्दों पर सीधी लड़ाई गायब है
उनके अनुसार संगठन सड़कों से गायब है, और इसका नुकसान जनता को भुगतना पड़ रहा है—
मूल समस्याएं जैसे—ध्वस्त स्वास्थ्य सेवाएं, प्रदूषण, ट्रैफिक, बेरोज़गारी और बढ़ती महंगाई—सत्ता और विपक्ष दोनों की राजनीति के शोर में दब जाती हैं।
समर्थकों की अपील: “लोकतंत्र बचाने के लिए जनता जागे”
कांग्रेस समर्थकों और चिंतित नागरिकों ने स्पष्ट कहा—
- कांग्रेस को संवाद, संगठन और जमीनी संघर्ष को मजबूत करना होगा
- भाजपा को भी आंतरिक खेमेबाज़ी छोड़कर जनता के मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए
- जनता को उन नेताओं से सवाल पूछने होंगे जो उनकी आवाज़ नहीं सुनते
उनका जोर— लोकतंत्र तभी मजबूत होगा, जब राजनीतिक दल पारदर्शी, जवाबदेह और जनता से ईमानदारी से जुड़े रहें।”









