“गुजरात 3 गुना बड़ा, फिर भी हरियाणा में टोल लूट ज्यादा! दीपेन्द्र हुड्डा ने उठाए कड़े सवाल”

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·        हरियाणा में प्रति व्यक्ति 917.1 रुपए की टोल वसूली हो रही है, जो देश में सबसे ज्यादा है – दीपेन्द्र हुड्डा

·        हरियाणा से टोल वसूली ज्यादा और बजट आवंटन कम, ये भेदभावपूर्ण नीति हरियाणा की जनता को स्वीकार्य नहीं – दीपेन्द्र हुड्डा

·        टोल वसूली के सरकारी आंकड़े बता रहे कि जनता की जेब से पैसा निचोड़कर सरकार निजी कंपनियों को फ़ायदा पहुँचा रही – दीपेन्द्र हुड्डा

·        संसद में दिए आंकड़ों के मुताबिक हरियाणा में टोल वसूली 2014–15 के ₹461.88 करोड़ से बढ़कर 2025–26 में ₹2,324.95 करोड़ यानी पाँच गुना से अधिक की बढ़ोतरी हुई– दीपेन्द्र हुड्डा

·        पिछले साल के मुकाबले इस साल अक्टूबर तक गुजरात में टोल वसूली 1928.57 करोड़ रुपये कम, जबकि हरियाणा में इस अवधि में 368.57 करोड़ रुपये अधिक हुई वसूली – दीपेन्द्र हुड्डा

चंडीगढ़, 4 दिसंबर। संसद में दीपेन्द्र हुड्डा द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब से स्पष्ट हुआ कि हरियाणा में जमकर टोल वसूली हो रही है। दीपेन्द्र हुड्डा ने कहा कि देखा जाए तो हरियाणा से 3 गुना बड़े प्रदेश गुजरात से ज्यादा टोल हरियाणा में वसूला जा रहा है, टोल वसूली के नाम पर हरियाणा की जनता की जेब खाली की जा रही है ये पूर्ण रूप से अस्वीकार्य है। उन्होंने कहा कि गुजरात में 62 टोल हैं जबकि हरियाणा में कहीं ज्यादा 75 टोल के माध्यम से वसूली हो रही है। इससे राज्य के लोगों पर अनावश्यक और असहनीय आर्थिक बोझ पड़ रहा हरियाणा से टोल वसूली ज्यादा और बजट आवंटन कम इसका सीधा उदाहरण टोल वसूली के अलावा केंद्र सरकार ने 3500 करोड़ के खेल बजट में से केवल 80 करोड़ ही दिया है। जबकि गुजरात को 600 करोड़ का खेल बजट दिया। है। ये भेदभावपूर्ण नीति हरियाणा की जनता को स्वीकार्य नहीं है। दीपेन्द्र हुड्डा ने मांग करी कि हरियाणा में आम जनहित में अन्यायपूर्ण और मनमानी वसूली पर रोक लगाई जाए। जहाँ परियोजनाएँ पूर्ण हो चुकी हैं, वहाँ टोल वसूली तुरंत बंद की जाए। टोल-फ्री वैकल्पिक मार्ग सुनिश्चित किए जाएँ।

उन्होंने बताया कि लोकसभा में उनके प्रश्न का जवाब केन्द्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने दिया। जिसके अनुसार पिछले साल के मुकाबले इस साल अक्टूबर तक गुजरात में टोल वसूली 1928.57 करोड़ रुपये कम हुई, जबकि हरियाणा में इस अवधि में 368.57 करोड़ रुपये अधिक वसूली हुई। सांसद दीपेन्द्र हुड्डा ने कहा कि हरियाणा में प्रति व्यक्ति सबसे ज्यादा 917.1 रुपए की टोल वसूली हो रही है,जो देश में सबसे ज्यादा है। इसके अलावा हरियाणा में प्रति वर्ष प्रति किलोमीटर टोल वसूली 0.69 करोड़ रुपये है जो देश में सबसे ज्यादा है। इतना ही नहीं, राष्ट्रीय राजमार्ग पर दो टोल प्लाजा के बीच न्यूनतम दूरी 60 किलोमीटर होनी चाहिए, जो कि राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क (दरों और संग्रहण का निर्धारण) नियम, 2008 के अनुसार निर्धारित है। लेकिन हरियाणा में दो टोल के बीच की दूरी देश में सबसे कम 45 किलोमीटर ही है। जो देश में सबसे ज्यादा है।

संसद में दीपेन्द्र हुड्डा के सवाल के जवाब से स्पष्ट है कि सरकार जनता की जेब से पैसा निचोड़कर निजी कंपनियों को फ़ायदा पहुँचा रही है। हरियाणा में राष्ट्रीय राजमार्गों पर टोल वसूली पिछले दस वर्षों में जिस तरह से आसमान छू गई है, जो केंद्र सरकार की पक्षपातपूर्ण जनविरोधी और ठेकेदार-प्रेमी नीति का सबसे बड़ा प्रमाण है। संसद में दिए आंकड़ों के मुताबिक हरियाणा में टोल वसूली 2014–15 के ₹461.88 करोड़ से बढ़कर 2025–26 में ₹2,324.95 करोड़ यानी पाँच गुना से अधिक की बढ़ोतरी हुई है। यह वृद्धि तब हो रही है जब न तो सड़कों की गुणवत्ता में सुधार हुआ, न ही टोल प्लाज़ाओं की संख्या कम हुई और न ही टोल की समाप्ति अथवा समीक्षा संबंधी कोई पारदर्शी नीति लागू की गई।

इसके विपरीत, केंद्र सरकार लगातार ऐसे अनुबंधों को बढ़ावा दे रही है जिनमें टोल की अवधि को मनमाने तरीके से बढ़ाया जाता है, जिससे हरियाणा, दिल्ली-एनसीआर के लाखों यात्रियों पर भारी आर्थिक बोझ पड़ रहा है। गुजरात के मुकाबले कहीं कम क्षेत्रफल वाले हरियाणा में अंधाधुंध टोल वसूली का यह खेल न सिर्फ अव्यवहारिक है, बल्कि आर्थिक शोषण का स्पष्ट उदाहरण है। हरियाणा में बड़ी संख्या में लोग रोज़ाना काम पर आने-जाने के लिए हाईवे का इस्तेमाल करते हैं, जिससे यह टोल वसूली सीधे आम जनता पर टैक्स का दोहरा बोझ बन गई है।

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Author: Bharat Sarathi

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