“कानून का क्रूर मज़ाक और सत्ता दुरुपयोग की पराकाष्ठा”: वेदप्रकाश विद्रोही

1 दिसंबर 2025, रेवाडी। स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने नेशनल हेराल्ड मामले में ईडी द्वारा दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा में सोनिया गांधी, राहुल गांधी समेत अन्य कांग्रेस नेताओं पर दर्ज कराई गई नई एफआईआर को “सत्ता दुरूपयोग की पराकाष्ठा” और “कानून के साथ क्रूर मज़ाक” करार दिया है।
विद्रोही ने सवाल उठाया कि जब इसी मुद्दे पर दिल्ली की अदालत में पहले से एक निजी शिकायत लंबित है, जिसके आधार पर ईडी पहले ही जांच कर राउज़ एवेन्यू कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर चुकी है, तो फिर उसी मामले में नई एफआईआर दर्ज करवाने की क्या जरूरत थी?
उनके अनुसार, यह कदम स्पष्ट संकेत देता है कि ईडी की पहले की गई मनी लॉन्ड्रिंग जांच और न्यायालय में दायर चार्जशीट कानूनी रूप से टिकने में सक्षम नहीं है और न्यायिक जांच में गिरने की पूरी आशंका है। इसलिए, मोदी–भाजपा सरकार के निर्देश पर मामले को “जिंदा” रखने के लिए एक और एफआईआर दर्ज करवाई गई है।
“देश का अपनी तरह का एकमात्र मामला”
विद्रोही ने कहा कि नेशनल हेराल्ड विवाद जांच एजेंसियों के अधिकारों के सबसे भौंडे दुरुपयोग का उदाहरण बन चुका है। उन्होंने याद दिलाया कि:
- इस मामले में बिना किसी एफआईआर के ईडी ने जांच शुरू की।
- एक भी रुपये के लेन-देन या
- किसी संपत्ति के मालिकाना हक के हस्तांतरण के बिना,
ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज कर दिया—जो देश के इतिहास में पहली बार हुआ है।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब पूरा देश जानता है कि नेशनल हेराल्ड केस में कोई सार नहीं है, तब भी गांधी परिवार और कांग्रेस के खिलाफ दुष्प्रचार के उद्देश्य से पिछले 11 वर्षों से यह मामला खींचा जा रहा है।
“नई एफआईआर, पुरानी मंशा”
विद्रोही के अनुसार, ईडी द्वारा दर्ज नई एफआईआर का उद्देश्य सिर्फ यही है कि यह मामला बंद न हो पाए और इसे भविष्य में और अधिक समय तक घसीटा जा सके। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक संस्थाओं के दुरुपयोग का सबसे ज्वलंत उदाहरण बताया।
सुप्रीम कोर्ट की चुप्पी पर भी प्रश्न
उन्होंने आश्चर्य प्रकट किया कि जब कानून का इतना बड़ा और “नग्न दुरूपयोग” हो रहा है, तब देश की सर्वोच्च अदालत भी चुप है।









