आयुर्वेदज्ञ पंडित प्रमोद कौशिक का संदेश: “नवरात्रि में करें नवदुर्गा औषधियों का सेवन, स्वास्थ्य लाभ पाएं”

कुरुक्षेत्र। आयुर्वेद के प्राचीन ग्रंथों में मानव कल्याण के अनेक रहस्य समाहित हैं। यह केवल रोग निवारण ही नहीं, बल्कि संपूर्ण स्वास्थ्य का मार्ग भी प्रशस्त करता है। आयुर्वेदज्ञ पंडित प्रमोद कौशिक ने नवरात्रि के अवसर पर नवदुर्गा के रूप में मानी जाने वाली नौ औषधीय पौधों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आयुर्वेद में देवी दुर्गा के नौ रूपों को नौ औषधियों के रूप में दर्शाया गया है।
1. शैलपुत्री (हरड़)
हरड़, जिसे हिमावती भी कहा जाता है, आयुर्वेद की प्रधान औषधि मानी जाती है। यह सात प्रकार की होती है – पथया, हरीतिका, अमृता, हेमवती, कायस्थ, चेतकी और श्रेयसी। हरड़ पाचन संबंधी समस्याओं से लेकर कई असाध्य रोगों के निवारण में सहायक है।
2. ब्रह्मचारिणी (ब्राह्मी)
ब्राह्मी को याददाश्त बढ़ाने और रक्त विकारों को दूर करने वाली औषधि के रूप में जाना जाता है। इसे ‘सरस्वती’ भी कहते हैं क्योंकि यह मस्तिष्क की क्षमता को बढ़ाकर स्वर को मधुर बनाती है।
3. चंद्रघंटा (चंदुसूर)
यह धनिए के समान एक पौधा है, जो मोटापा कम करने में सहायक है। इसे ‘चर्महंती’ भी कहा जाता है। चंदुसूर का सेवन वजन घटाने के लिए उपयोगी है।
4. कूष्मांडा (पेठा)
कूष्मांडा, जिसे कुम्हड़ा भी कहा जाता है, रक्त विकारों को दूर कर पाचन में सहायक है। यह मानसिक रोगों में अमृत समान है। वैद्य पंडित प्रमोद कौशिक ने लोगों से अपील की कि बाजार में मिलने वाले सैक्रीन युक्त पेठे की बजाय घर में बना पेठा सेवन करें।
5. स्कंदमाता (अलसी)
अलसी, देवी स्कंदमाता का प्रतीक है। यह वात, पित्त और कफ के रोगों का नाश करती है। इसमें फाइबर की प्रचुर मात्रा होती है, जो पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने के साथ रक्त को भी शुद्ध करती है।
6. कात्यायनी (मोइया)
मोइया को कफ, पित्त और गले के रोगों में लाभकारी माना जाता है। इसे अम्बा, अम्बालिका और अम्बिका के नाम से भी जाना जाता है। इसका नियमित सेवन श्वास और गले से जुड़े विकारों को दूर करता है।
7. कालरात्रि (नागदौन)
नागदौन मानसिक और मस्तिष्क विकारों में अत्यंत लाभकारी है। पाइल्स जैसी गंभीर समस्या में यह रामबाण औषधि के रूप में काम करती है। इसे स्थानीय भाषा में ‘दूधी’ भी कहा जाता है।
8. महागौरी (तुलसी)
तुलसी के सात प्रकार होते हैं – सफेद तुलसी, काली तुलसी, मरूता, दवना, कुढेरक, अर्जक और षटपत्र। तुलसी रक्त को शुद्ध कर हृदय रोगों से बचाव करती है। एकादशी को छोड़कर प्रतिदिन इसका सेवन करना चाहिए।
9. सिद्धिदात्री (शतावरी)
दुर्गा का नवां रूप ‘सिद्धिदात्री’ शतावरी के रूप में पूजनीय है। यह प्रसूताओं के लिए विशेष लाभकारी है, जिन माताओं को ऑपरेशन के पश्चात दूध की कमी होती है, उनके लिए यह संजीवनी का कार्य करती है।
नवदुर्गा औषधियों का करें सेवन, स्वास्थ्य लाभ पाएं
वैद्य प्रमोद कौशिक ने नवरात्रि के अवसर पर अपील की कि हम इन औषधीय पौधों का नियमित सेवन करें और दूसरों को भी इसके महत्व से अवगत कराएं। नवरात्रि जैसे पवित्र अवसर पर इन औषधीय पौधों का उपयोग करके हम न केवल अपने स्वास्थ्य को संवार सकते हैं, बल्कि इनकी दिव्य शक्ति से आंतरिक शुद्धि भी कर सकते हैं।
(रिपोर्ट: भारत सारथी)