
चंडीगढ़,गुरुग्राम,रेवाड़ी। ग्रामीण भारत स्वयंसेवी संस्था के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने हरियाणा के 44 टोल प्लाजाओं पर टोल दरों में 5 से 25 रुपये प्रति वाहन की बढ़ोतरी को कड़ी आलोचना करते हुए इसे आमजन की सरकारी लूट करार दिया। उन्होंने कहा कि यह फैसला आमजन की जेबों पर डाका डालने जैसा है।
“सरकार बना रही है सड़कों को आय का स्रोत”
विद्रोही ने कहा कि केंद्र की मोदी-भाजपा सरकार टोल प्लाजाओं के माध्यम से भारी-भरकम टोल टैक्स वसूलकर आमजन से सरकारी खजाना भरने में लगी है। उन्होंने आरोप लगाया कि टोल टैक्स से बनने वाली सड़कें अब सरकार के लिए आय का साधन बन चुकी हैं।
“कांग्रेस राज की तुलना में तीन गुना अधिक टोल”
उन्होंने आंकड़ों के माध्यम से बताया कि कांग्रेस शासन में प्रति किलोमीटर टोल टैक्स 1.17 रुपये था, जो मोदी सरकार में बढ़कर 3.50 रुपये प्रति किलोमीटर हो गया है। यह वृद्धि लगभग 300 प्रतिशत है। विद्रोही ने कहा कि जहां कांग्रेस शासन के दौरान (वर्ष 2013-14) टोल टैक्स से सालाना 17,759 करोड़ रुपये की वसूली होती थी, वहीं मोदी-भाजपा सरकार में (वर्ष 2023-24) यह आंकड़ा बढ़कर 85 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
“असुविधाजनक सड़कों पर भारी टैक्स अन्यायपूर्ण”
विद्रोही ने कहा कि हरियाणा में टोल दरें बढ़ने से हर वाहन मालिक को प्रतिदिन 5 से 25 रुपये अतिरिक्त खर्च करना होगा, जो खुली लूट है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार और संघीय संगठनों से जुड़ी कंपनियों को टोल प्लाजा संचालन का ठेका देकर दोहरी लूट की जा रही है।
“टोल दरों को न्यायसंगत बनाएं”
विद्रोही ने मांग की कि टोल दरों में अंधाधुंध बढ़ोतरी को तुरंत रोका जाए और आमजन को राहत देने के लिए दरों को न्यायसंगत बनाया जाए। उन्होंने कहा कि जब तक टोल टैक्स वसूली के अनुपात में सड़कों की गुणवत्ता में सुधार नहीं किया जाता, तब तक इसे जायज नहीं ठहराया जा सकता।