अप्रैल फूल बनाया, उनको गुस्सा आया, मेरा क्या कसूर, जमाने का कसूर, जिसने दस्तूर बनाया।

पहले केवल एक दिन मूर्ख दिवस मनाने का चलन था, लेकिन आज डिजिटल युग में रोजाना लोग डिजिटल प्लेटफॉर्म, हनीट्रैप, फर्जी ईमेल, बैंक फ्रॉड, मैसेज, ऑनलाइन लॉटरी आदि के जरिए मूर्ख बन रहे हैं।

एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं

हंसी-मजाक और ठहाकों का महत्व:

वर्तमान डिजिटल युग में लोग इतने व्यस्त हो गए हैं कि हंसी-मजाक कहीं खो गई है। 60+ उम्र के लोग आज भी ‘अप्रैल फूल’ फिल्म के गाने को याद कर ठहाके लगाते हैं। हंसी और ठहाके सेहत के लिए टॉनिक का काम करते हैं। अप्रैल फूल डे पर खुद मूर्ख बनने और दूसरों को मूर्ख बनाने में आनंद आता है।

अप्रैल फूल की परंपरा:

हर साल 1 अप्रैल को दुनियाभर में अप्रैल फूल डे मनाया जाता है। इस दिन लोग दोस्तों और परिवारजनों को बेवकूफ बनाकर मजा लेते हैं। पहले यह दिन फ्रांस और अन्य यूरोपीय देशों में ही मनाया जाता था, लेकिन अब यह वैश्विक हो चुका है।

डिजिटल युग और मूर्खता:

पहले केवल एक दिन मूर्ख दिवस मनाया जाता था, पर अब डिजिटल युग में हर दिन कोई न कोई डिजिटल फ्रॉड से मूर्ख बनता है। ऑनलाइन ठगी, फर्जी ईमेल, लॉटरी मैसेज आदि के जरिए लोग रोजाना मूर्ख बन रहे हैं।

इतिहास और कहानियाँ:

अप्रैल फूल डे के पीछे कई कहानियाँ प्रचलित हैं। माना जाता है कि इसकी शुरुआत 1381 में हुई थी, जब राजा रिचर्ड ने 32 मार्च को सगाई की घोषणा कर दी। इसके अलावा यूरोप में पहले 1 अप्रैल को नया साल माना जाता था।

निष्कर्ष: मूर्ख दिवस पर दूसरों को और खुद को मूर्ख बनाकर खुशियां मनाना सेहत के लिए अच्छा है। हालांकि, डिजिटल युग में मूर्खता से बचने के लिए सतर्क रहने की जरूरत है।

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