
गुरुग्राम, 25 मार्च – इंजीनियर गुरिंदरजीत सिंह ने केंद्र सरकार द्वारा सांसदों की वेतन और पेंशन में बढ़ोतरी पर कड़ा सवाल उठाते हुए इसे दोहरे मापदंड करार दिया। उन्होंने कहा कि 2004 के बाद सरकारी कर्मचारियों की पेंशन बंद कर दी गई, लेकिन सांसदों और विधायकों को आजीवन पेंशन और बढ़ते भत्तों की सुविधाएं दी जा रही हैं।
गुरिंदरजीत सिंह ने कहा, “जो सरकारी कर्मचारी पूरी जिंदगी नौकरी करता है, उसे पेंशन नहीं मिलती, लेकिन सिर्फ पांच साल के लिए चुने गए सांसदों को जीवनभर पेंशन और अन्य सुविधाएं क्यों?” उन्होंने आरोप लगाया कि जब सांसदों और विधायकों की सैलरी या भत्ते बढ़ाने की बात आती है, तो सभी राजनीतिक दल एकजुट हो जाते हैं और प्रस्ताव तुरंत पारित हो जाता है। लेकिन जब बात सरकारी कर्मचारियों की सैलरी और डीए (महंगाई भत्ता) बढ़ाने की आती है, तो सरकार आनाकानी करने लगती है।
सांसदों का वेतन और पेंशन बढ़ा, कर्मचारियों की डीए बढ़ोतरी पर अब भी इंतजार
केंद्र सरकार ने 1 अप्रैल 2023 से सांसदों के वेतन और पेंशन में वृद्धि की अधिसूचना जारी की है। इसके तहत: सांसदों का वेतन – ₹1,00,000 से बढ़ाकर ₹1,24,000 प्रति माह
दैनिक भत्ता – ₹2,000 से बढ़ाकर ₹2,500
मासिक पेंशन – ₹25,000 से बढ़ाकर ₹31,000
अतिरिक्त पेंशन – ₹2,000 से बढ़ाकर ₹2,500 प्रति माह
गुरिंदरजीत सिंह ने कहा कि “सांसदों की तनख्वाह और भत्तों में 25% की वृद्धि कर दी गई, लेकिन सरकारी कर्मचारियों के डीए (महंगाई भत्ता) में बढ़ोतरी का फैसला अभी तक लटका हुआ है।”
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि “जब सरकार की अपनी सैलरी और भत्ते बढ़ाने की बात आती है, तो उसे वित्तीय बोझ की चिंता नहीं होती, लेकिन कर्मचारियों के वेतन और पेंशन की बात पर बहाने बनाए जाते हैं।”
कर्नाटक सरकार ने भी विधायकों का वेतन किया दोगुना
यह फैसला तब आया है जब कर्नाटक सरकार ने मुख्यमंत्री, मंत्रियों और विधायकों के वेतन में 100% की वृद्धि को मंजूरी दी। इसके लिए ‘कर्नाटक मंत्रियों के वेतन और भत्ते (संशोधन) विधेयक 2025’ और ‘कर्नाटक विधानमंडल सदस्यों के वेतन, पेंशन और भत्ते विधेयक 2025’ पारित किए गए।
गुरिंदरजीत सिंह ने कहा कि “सांसदों और विधायकों को इतनी भारी बढ़ोतरी दी गई, लेकिन आम जनता और कर्मचारियों को अपनी जायज मांगों के लिए सालों इंतजार करना पड़ता है। आखिर यह अन्याय कब तक चलेगा?”
“जनता का खून चूस रहे, खुद भर रहे अपनी तिजोरियां”
उन्होंने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि “जनता महंगाई की मार झेल रही है, बेरोजगारी चरम पर है, गरीबों को 5 किलो राशन देकर खुश करने की कोशिश हो रही है, लेकिन करोड़पति सांसदों की तनख्वाह और भत्ते लगातार बढ़ाए जा रहे हैं।”
गुरिंदरजीत सिंह ने सरकार से मांग की कि जिस तरह सांसदों और विधायकों के वेतन और पेंशन में तेजी से बढ़ोतरी की गई है, उसी तरह सरकारी कर्मचारियों और आम जनता के हितों को भी प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने कहा कि “सरकार को सिर्फ नेताओं का ही नहीं, बल्कि आम आदमी का भी ध्यान रखना चाहिए।”