दोस्ती का मौसम आया : भारत-चीन के रिश्तों में मधुरता, अमेरिका-रूस के संबंधों में नई गर्माहट …….

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भारत-चीन बनाम अमेरिका-रूस – दोस्ती के नए आयामों  की ओर   

पूरी दुनियाँ एक होकर प्रेम भाईचारे से वसुधैव कुटुम्बकम यानें पूरा विश्व एक परिवार है,इस वचन पर चले तो पृथ्वी लोक का जन्नत होना तय

-एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं

भूमिका

वैश्विक स्तर पर वर्तमान समय में अनेक देशों के बीच संबंधों में परिवर्तन देखने को मिल रहा है। जहां एक ओर भारत और चीन के रिश्ते पटरी पर आने लगे हैं, वहीं दूसरी ओर अमेरिका और रूस के संबंध भी धीरे-धीरे सुधरने की ओर अग्रसर हैं। इस बदलते परिदृश्य में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह परिवर्तन अंतरराष्ट्रीय राजनीति में स्थाई शांति की ओर संकेत करता है?

भारत-चीन संबंधों में सकारात्मक बदलाव

हाल के दिनों में भारत और चीन के विदेश मंत्रियों के बीच कई महत्वपूर्ण बैठकें हुई हैं। दक्षिण अफ्रीका में आयोजित जी-20 बैठक के दौरान दोनों देशों के विदेश मंत्रियों ने सीमा विवाद, कैलाश मानसरोवर यात्रा की बहाली, उड़ान कनेक्टिविटी और व्यापार संबंधी विषयों पर चर्चा की। दोनों देशों के बीच हाल के वर्षों में सीमा विवाद और अन्य राजनीतिक मतभेद रहे हैं, लेकिन इन बैठकों से यह संकेत मिल रहा है कि संबंधों को सुधारने की दिशा में सकारात्मक प्रयास किए जा रहे हैं।भारत और चीन दोनों ही वैश्विक मंचों जैसे जी-20, एससीओ और ब्रिक्स के प्रमुख सदस्य हैं। इसलिए, इनके आपसी संबंधों का सुधार न केवल क्षेत्रीय स्थिरता के लिए बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और सुरक्षा के लिए भी महत्वपूर्ण है।

अमेरिका-रूस संबंधों में नई गर्माहट

एक लंबे समय से अमेरिका और रूस के संबंधों में तनाव बना हुआ था, विशेष रूप से रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते यह तनाव और बढ़ गया था। हालांकि, हाल ही में सऊदी अरब की मध्यस्थता में अमेरिका और रूस के बीच उच्च स्तरीय बैठक हुई, जिसने दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संबंधों को फिर से पटरी पर लाने की संभावना को बल दिया।डोनाल्ड ट्रंप और व्लादिमीर पुतिन के पुराने रिश्ते को देखते हुए, यह उम्मीद की जा रही है कि अमेरिका और रूस के बीच कूटनीतिक वार्ता से रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने का मार्ग निकलेगा। इस बैठक में यह सहमति बनी कि दोनों देश जल्द ही अपने दूतावासों को पुनः संचालित करेंगे और कूटनीतिक वार्ता को आगे बढ़ाएंगे।

वैश्विक परिदृश्य और भविष्य की संभावनाएं

आज की वैश्विक राजनीति बहुध्रुवीय हो रही है, जहां केवल एक या दो महाशक्तियों का वर्चस्व नहीं रह गया है। भारत, चीन, अमेरिका और रूस जैसे देशों के आपसी संबंधों में बदलाव दुनिया की राजनीतिक और आर्थिक स्थिरता को प्रभावित कर सकते हैं। यदि ये देश परस्पर सहयोग और संवाद के माध्यम से अपने रिश्तों को सुधारते हैं, तो इससे वैश्विक शांति और समृद्धि को बढ़ावा मिलेगा।जी-20 की थीम ‘वसुधैव कुटुंबकम’ यानी ‘पूरा विश्व एक परिवार है’ के दृष्टिकोण को अपनाने से दुनिया में प्रेम, भाईचारे और सहयोग की भावना को बल मिलेगा। यदि पूरी दुनिया इस सिद्धांत पर चले, तो निश्चित रूप से पृथ्वी को स्वर्ग बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया जा सकता है।

निष्कर्ष 

यदि हम समग्र रूप से इस विषय का अध्ययन करें, तो यह स्पष्ट होता है कि भारत-चीन और अमेरिका-रूस के संबंधों में सुधार वैश्विक राजनीति के संतुलन को सकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकता है। यह बदलाव अंतरराष्ट्रीय सहयोग और शांति की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।

-संकलनकर्ता लेखक – क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए(एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र

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Author: Bharat Sarathi

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