देश में पहली ही बारिश में हुए कई नवनिर्मित स्थलों पर दुखदाई हादसे। और उठे निर्माण की गुणवक्ता पर सवाल : गुरिंदरजीत सिंह
बारिश के आगे बेबस हुआ शासन प्रशासन : गुरिंदरजीत सिंह

गुरुग्राम : गुरुग्राम के समाजसेवी इंजीनियर गुरिंदरजीत सिंह अर्जुन नगर ने हाल ही में हुई बारिश पर कहा कि पहली ही बारिश ने सरकार के विकास की पोल खोल दी। तेज और मूसलाधार बारिश के कारण गुरुग्राम एन.सी.आर.के ज्यादतर इलाको में पानी भर गया ।
उन्होंने ने कहा कि चुनाव से पहले तो सरकार बड़े बड़े वादे कर रही थी। 100 दिनों का प्लान था। सब की पोल एक बारिश ने खोल दी। शहर के शहर जलमग्न दिखे। सफाई का कोई नामोनिशाँ नही। जगह जगह गंदगी के ढेर लगे पड़े है। बरसाती पानी में बहकर कूड़ा सड़को गलियों में फैला हुआ है। शासन प्रशासन की तरफ से कोई भी ध्यान नही दे रहा।

उन्होंने ने कहा कि अगर बात देश की, की जाए तो सबसे पहले देश की राजधानी अपनी दिल्ली का नाम आता है। दिल्ली T1 एयरपोर्ट का हादसा बताता है कि अधिकारियों और रख रखाव करने वाली कंपनी ने कोई कार्य नही किया। छत टूटने से जो हादसा हुआ, ये सबने देखा। इस का ज़िम्मेदार आज की सरकार है और हमे ऐसी गैर ज़िम्मेदार सरकार नही चाहिए।

साथ ही उन्होंने कहा कि देश की आस्था का केन्द्र है श्री राम मन्दिर, अयोध्या। उसके हाल भी किसी से छिपे नही। करोडो की लागत से बनने वाला श्रीराम मंदिर, अयोध्या, जिस के मन्दिर की बिल्डिंग का काम आज तक चल रहा है। आप को बता दे कि प्रधानमन्त्री मोदी ने 22 जनवरी, 2024 को उद्घाटन किया था। मन्दिर के अधूरे बिल्डिंग कार्य/ शिखर ना होने से पानी अंदर टपका। मंदिर और प्रांगण जल मग्न हुआ। बरसात में निकास ना होने से मन्दिर में बारिश का पानी भर गया। ये कैसा अधूरा विकास कार्य चल रहा है, हमारे देश में।

उन्होंने कहा कि चुनाव के पहले फ़ीता काटने की आतुरता का ख़ामियाज़ा देश को भुगतना पड़ रहा है। ऐसी भी क्या जल्दी थी मोदी जी को? अटल सेतु में भी दरारे आ गयी है। अटल सेतु ₹18,000 करोड़ की लागत बना, जिस का उद्घाटन मोदी जी ने 12 जनवरी, 2024 को किया था। ऐसे अधूरे व कम गुणवक्ता वाले कार्यो को जल्दबाज़ी में जनता को समर्पित करना जनता की जान माल के साथ ख़िलवाड़ है। उन्होंने कहा कि अगर कोई भी बिल्डिंग, सड़क, सेतु, टंनल आदि का कार्य पूरा नही हुआ, बिना टेस्ट के जनता को समर्पित करना जोखिम भरा है। साथ ही उन्होंने कहा कि अगर किसी जान माल का कोई नुकसान होता है तो ऐसे में काम करने वाली व स्वीकृति देने वाली एजेंसियों और अधिकारियों के साथ संबन्धित मंत्रालय के खिलाफ सख्त कार्यवाही होनी चाहिए। ताकि आगे से ऐसी गलती कभी न हो।