1930 हेल्पलाइन हो रही कारगर साबित, साइबर जालसाजों से इस साल बचा चुके हैं 11 करोड़ रूपए

चंडीगढ़, 17 अगस्त – हरियाणा पुलिस की राज्य अपराध शाखा ने पंचकूला स्थित एक गेमिंग कंपनी के साथ साइबर जालसाज द्वारा की गई ठगी के मामले में तेजी से प्रभावी कार्रवाई करते हुए यूजर के खाते में जमा 30 लाख रुपये को फ्रिज करने में कामयाबी हासिल की है। 

इसके अतिरिक्त, साइबर टीम ने जनवरी और जुलाई, 2022 के बीच साइबर अपराधियों की रफतार पर बे्रक लगाते हुए आम जनता के करीब 11 करोड़ रुपये उनके बैंक खातों में वापस लाने में भी मदद की है। 

अपर पुलिस महानिदेशक, राज्य अपराध शाखा हरियाणा, श्री ओपी सिंह ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि पंचकूला स्थित एक गेमिंग कंपनी के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर ने 1930 में शिकायत दर्ज कर जानकारी दी कि एक एप्लिकेशन यूजर ने उनके साथ 35 लाख रुपये की साइबर ठगी की है। 14 अगस्त को कंपनी की खाता रिपोर्ट तैयार करते समय पता चला कि 11 अगस्त को एक यूजर के वाॅलेट में 35 लाख रुपये अनधिकृत जमा हुए हैं जिसे यूजर द्वारा 12 और 13 अगस्त को अपने वाॅलेट से अपने पर्सनल खाते में स्थानांतरित किया गया है।

  जैसे ही इस ट्रांसक्शन का पता चला, शिकायतकर्ता ने यूजर से बात की, जिसने पैसे देने से इनकार कर दिया और फोन बंद कर दिया। धोखाधड़ी का पता चलने के बाद, इसकी शिकायत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर की गई। पीड़ित द्वारा 1930 पर ‘गोल्डन ऑवर्स‘ में दी गई सूचना पर साइबर टीम ने एक्शन लेते हुए तुरंत यूजर के खाते में जमा 30 लाख रुपये फ्रीज कर दिए। इस संबंध में साइबर पुलिस स्टेशन, पंचकूला में एक शिकायत दर्ज की गई है और आगे की जांच जारी है।

नेशनल साइबर हेल्पलाइन प्रतिदिन बचा रही लाखों रूपये 

नेशनल साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 की शुरुआत इसी साल जनवरी में हुई थी। इस पहल को आगे बढ़ाते हुए राज्य में कुल 29 साइबर पुलिस थाने स्थापित किए गए हैं, जिनमें साइबर अपराध के पीड़ित लोग अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। वर्तमान में राज्य में 1930 पर प्रतिदिन 600 से अधिक कॉल प्राप्त हो रही हैं। हमारी साइबर टीम द्वारा 24 घंटे की इस हॉटलाइन पर रोजाना करीब 7 लाख रुपये बचाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि साइबर नोडल एजेंसी के रूप में कार्यरत राज्य अपराध शाखा ने 1930 पर मिली शिकायतों के बाद इस साल जुलाई तक आमजन के करीब 11 करोड़ रुपये बचाए है। इस संबंध में 459 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।

राज्य अपराध शाखा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से कर रही जागरूक, करती है मजाकिया ट्वीट और पूछती है साइबर क्राइम पर सवाल   

ओपी सिंह, जो स्वयं एक टेक-सैवी अधिकारी हैं और साइबर अपराधों की रोकथाम पर कड़े फैसले लेने के लिए जाने जाते हैं, ने बताया कि समय के साथ कंप्यूटर, स्मार्टफोन और इंटरनेट के उपयोग में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। हाल के दिनों में प्रौद्योगिकी के बढ़ते उपयोग ने साइबर धोखाधड़ी में भी तेजी से वृद्धि की है। साथ ही जागरूकता के अभाव में साइबर क्राइम पांव पसार रहा है। 

इसे देखते हुए हमने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए जागरूकता फैलाने का निर्णय लिया है। जन जागरूकता बढ़ाने के लिए ट्विटर, फेसबुक, कू और इंस्टाग्राम पर मजेदार ट्वीट और पोस्ट किए जा रहे हैं। हम चाहते हैं कि जनता जागरूक हो और साथ ही बोरियत भी महसूस न करे। एक छात्र सोशल मीडिया से जुड़ा है और एक गृहिणी भी, हम उन्हें घर बैठे जागरूक करना चाहते हैं ताकि साइबर जालसाजों को मुंहतोड़ जवाब दिया जा सके। इसके अलावा जागरूकता बढ़ाने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर साइबर क्राइम से जुड़े सवाल भी पूछे जा रहे हैं। 

उन्होंने लोगों से सतर्क रहते हुए किसी भी प्रकार के ऑनलाइन प्रलोभन से दूर रहने का भी आग्रह किया। साइबर क्राइम के माध्यम से यदि कोई ठगा जाता है तो तुरंत साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर ऐसी धोखाधड़ी की सूचना दें।

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