-कमलेश भारतीय

एनसीपी के सुप्रीमो , पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं कभी महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री रहे वरिष्ठ नेता शरद पवार की चिंताएं काफी हैं । पहले तो अपने-अपने को बचा कर रखना , फिर महाराष्ट्र सरकार को जोड़कर रखना और फिर यूपीए को लेकर सोचना । महाराष्ट्र में यदि एनसीपी , शिवसेना व कांग्रेस गठबंधन की सरकार चल रही है तो इसके पीछे शरद पवार का ही हाथ और विचार है ।

शिवसेना और कांग्रेस कभी एकसाथ आयेंगे यह तो भाजपा ने कभी सोचा ही नहीं था और इसी भ्रम में भाजपा ने शिवसेना को सत्ता से दूर रखने को सोची जबकि शिवसेना आधा आधा समय राज देने की मांग कर रही थी ।भाजपा अपने भ्रम में जीती रही और शरद पवार ने एक ऐसा गठबंधन बना दिया जिससे भाजपा के चाणक्य अमित शाह भी समझ न पाये । फिर बहुत कोशिश की गठब॔धन को तोड़ने की लेकिन न कंगना रानौत कुछ कर पाई और न ही अमित शाह की कोई गोटी चल पाई । महाराष्ट्र सरकार चल रही है शान से लेकिन शरारतें जारी हैं ।

अभी शिवसेना के राज्यसभा सांसद व मुखपत्र सामना के संपादक की सोलह करोड़ की सम्पत्ति अटैच कर ली गयी है और इसी सिलसिले में शरद पवार पे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलकर इसे अन्याय बताया है और गलत कदम भी कहा है । ऐसा साहस करना भी किसी किसी के बस की बात है आज । यह भी मीडिया से फिर दोहराया कि कांग्रेस के बिना विपक्ष का मोर्चा नहीं बन सकता जबकि तृणमूल कांग्रेस , आप और सपा जैसे दल कांग्रेस के बिना ही विपक्षी एकता के पक्षधर हैं । बार बार शरद पवार कांग्रेस को साथ लेने की बात करते कह रहे हैं कि कांग्रेस के बिना विपक्ष नहीं । यह बात दूसरे दल समझने को तैयार नहीं जिससे कि विपक्ष की राजनीति व रणनीति नहीं हो पा रही । सच्ची और खरी बात विपक्ष को मान लेनी चाहिए । नहीं तो दूर होती जायेगी और विपक्ष राज्य दर राज्य हारते जायेगा ।

चर्चा है कि प्रशांत किशोर कांग्रेस में शामिल हो सकते हैं । इससे भी रणनीति में कुछ बदलाव आयेगा । हालांकि हरियाणा प्रदेश कांग्रेस के दो गुटों में रोज अग्निपरीक्षा जारी है । एक गुट दिल्ली में बैठकें कर रहा है तो दूसरा गुट चंडीगढ़ में । जनता इतनी बेवक्त नहीं जिसे हम एक है कहकर बरगलाया जाता रहे । जनता सब समझ रही है और नहीं समझ रहे तो दो बड़े नेता ।समय के अनुसार रणनीति बदल लेनी चाहिए
-पूर्व उपाध्यक्ष, हरियाणा ग्रंथ अकादमी ।

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