-कमलेश भारतीय

कविता /शेर या कोई प्रसंग हर जगह उपयुक्त होते हैं । छोटी पंचायत हो या सबसे बड़ी पंचायत यानी संसद सब जगह कवितांश या शेर ओ शायरी उपयोग किये जाते हैं । ज्ञानी जैल सिंह , तारकेश्वरी सिन्हा , अटल बिहारी वाजपेयी सभी इनका भरपूर उपयोग करते थे । अटल बिहारी वाजपेयी तो खुद कवि भी थे । इधर इस परंपरा को कांग्रेस की महासचिव व उत्तर प्रदेश की प्रभारी प्रियंका गांधी ने आगे बढ़ाया है चित्रकूट की जनसभा में जहां उन्होंने कवि पुण्यमित्र उपाध्याय की कविता का पाठ किया -सुनो द्रौपदी शस्त्र उठा लो

अब गोविंद न आएंगे,,,
वे ‘लड़की हूं , लड़ सकती हूं’ संवाद में अपनी बात रख रही थीं । उन्होंने देश को धर्म व जाति की सियासत से निकाल कर विकास की सियासत की ओर ले जाने के लिए महिलाओं को आगे आने की जरूरत पर जोर दिया । प्रियंका ने कहा कि राजनीति में करूणा भाव लाने , हिंसा और क्रूरता को खत्म करने के लिए आपको आगे आना होगा ।

इस तरह प्रियंका ने चालीस प्रतिशत सीटें महिलाओं को देने का वादा भी दोहराया और भूमिका भी बना दी । खैर , इस कविता को राजनीति में अपने फायदे के लिए उपयोग करने पर प्रियंका की आलोचना भी रही है लेकिन प्रियंका ने नारी पर हो रहे अन्याय, शोषण व दबाये जाने को प्रमुखता से इस कविता के प्रसंग से उठा दिया है । चाहे दिल्ली का निर्भया कांड हो या तेलंगाना की डाॅक्टर का कांड हो या फिर एसिड अटैक, नारी पर इस तरह के क्रूर अत्याचार, यौन शोषण की घटनाएं पढ़ने/सुनने को मिलती रहती हैं । एक बार चंडीगढ़ प्रेस क्लब में ऐसी ही विचार चर्चा में हरियाणा की एक्ट्रेस मेघना मलिक ने भी अपने बचपन की बात शेयर करते बताया था कि बेशक वे प्रिंसिपल मां की बेटी थीं , फिर भी काॅलेज साइकिल पर जाते समय ऐसे इशारे सहन करने पड़ते थे । इसी प्रकार हमारी चैंपियन मुक्केबाज मेरीकाॅम ने भी एक पत्र में जो अपने बेटों के नाम संबोधित किया था , साफ साफ बताया कि एक बार वह हरियाणा के किसी शहर में रिक्शा पर बैठ कर जा रही थी जब उसे छेड़छाड़ का शिकार होना पड़ा । उन्होंने अपने बेटों को दूसरी बेटियों की रक्षा करने का संदेश दिया था ।

नारी को अपने देश में देवी बना कर पूजा तो जाता है और नवरात्र पर घर घर इनके चरण पखारे जाते हाथ लेकिन इन्हें नारी के तौर पर सम् मान देना जरूरी है । देवी बनाना या मानना अलग बात है ।

प्रियंका गांधी ने एक नारी होने के नाते एक सही संदेश दिया है । बेशक राजनीति प्रेरित ही माना जाये । कभी जयशंकर प्रसाद ने लिखा :
नारी तुम केवल श्रद्धा हो,,,

पर अब नारी के प्रति श्रद्धा ही नहीं बल्कि उसके अधिकार देने और सम्भान देने की बात उठाई है प्रियंका ने । देखें , संदेश कहां तक जाता है ,,,?
-पूर्व उपाध्यक्ष हरियाणा ग्रंथ अकादमी ।

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