हरियाणा स्टॉफ सिलेक्शन कमीशन बना हरियाणा युवा शोषण कमीशन 
हरियाणा सरकार सरकारी नौकरियों पर श्वेत पत्र जारी करे

रमेश गोयत

चंडीगढ़। रणदीप सिंह सुरजेवाला, महासचिव व मीडिया प्रभारी, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ने कहा कि नॉन एचसीएस कैडर से आईएएस पद प्रमोशन प्रक्रिया घोटाले की निष्पक्ष न्यायिक जांच हो। खट्टर सरकार द्वारा विज्ञापित सरकारी नौकरियों को लटकाना युवाओं के साथ सीधा धोखा। भाजपा-जजपा सरकार में हर दिन एक नया नौकरी घोटाला सामने आ रहा है। कई कई सालों तक विज्ञापित सरकारी नौकरियों में या तो भर्ती नहीं होती या उनमें नौकरियों की बंदरबांट करने के लिए घोटाले और पेपर लीक करके अयोग्य लोगों को भर्ती करके प्रदेश के युवाओं का भविष्य अंधकारमय किया जा रहा है। खट्टर सरकार हरियाणा के इतिहास में सबसे ‘युवा विरोधी’ सरकार साबित हुई है। रोजगार के नाम पर लाखों युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करना भाजपा-जजपा सरकार का सबसे बड़ा शौक साबित हो रहा है। खट्टर सरकार ने हरियाणा के युवाओं का भविष्य अंधकारमय बना दिया है। 

नॉन एचसीएस कैडर से आईएएस पद पर प्रमोशन की प्रक्रिया में कथित घोटाले के लिए मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल खट्टर और उपमुख्यमंत्री श्री दुष्यंत चौटाला कठघरे में हैं और उन्हें इस मामले में प्रदेश के युवाओं को जवाब देना चाहिए कि विज्ञापन में 500 अंक का प्रश्न पत्र निर्धारित किया, परीक्षा भी इतने ही अंकों की हुई, लेकिन भर्ती 465 नंबर के आधार पर कैसे की जा रही है? प्रदेश सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि 35 अंक कहाँ व क्यों कम हुए? 4 अधिकारी जो पहले अयोग्य घोषित थे, वो बाद में किसके दबाव में योग्य घोषित हो गए? एक अधिकारी के आवेदन व परीक्षा परिणाम के नाम में अंतर कैसे हो गया?

भाजपा सरकार की गलत नीतियों के कारण हरियाणा में देश में सबसे ज्यादा बेरोजगारी दर पहुंच गई है, लेकिन सरकार का ध्यान केवल हैडलाइन मैनजमेंट और युवाओं को बहकाने व बरगलाने में है। विधानसभा चुनाव से ठीक पहले युवाओं को लुभाने के लिए जून, 2019 में 5,000 पुरुष कांस्टेबल और 1,000 महिला कांस्टेबल के लिए खट्टर सरकार ने भर्ती निकाली, 18 महीने तक कोई कार्यवाही नहीं की और अब नई भर्ती निकालने के नाम पर उसे वापस ले लिया, जो कि युवाओं के साथ सीधा-सीधा धोखा है। यदि सरकार को 500 पुरुष कांस्टेबल और 100 महिला कांस्टेबल के लिए नई भर्ती निकालनी थी तो पहले वाली भर्ती क्यों रद्द हुई। अब सारी प्रक्रिया दोबारा होगी और फिर कोई नया तकनीकी कारण ढूंढ कर युवाओं को मँझदार में छोड़ दिया जाएगा।

हरियाणा स्टॉफ सिलेक्शन कमीशन, हरियाणा युवा शोषण कमीशन बन गया है। नकारापन का आलम यह है कि वर्ष 2015 में विज्ञापित भर्तियां आज तक नहीं भरी गई हैं, जिनमें पटवारी, जूनियर इंजीनियर (इलेक्ट्रिकल), जूनियर इंजीनियर (हॉर्टिकल्चर), ऑडिटर, ट्रेसर, ड्रॉफ्ट्समैन, टीजीटी इंग्लीश, एक्साइज इंस्पेक्टर, टैक्सेशन इंस्पेक्टर आदि पदों की भर्ती प्रक्रिया पिछले 6 सालों से ‘जारी’ है। इन पदों के लिए लाखों युवाओं ने आवेदन किया और उनका भविष्य अभी भी अधर में है, जिसके लिए हरियाणा की खट्टर-चौटाला सरकार सीधे रुप से जिम्मेदार है।

हरियाणा में छह सालों में दर्जनों पेपर लीक हो चुके हैं व प्रदेश पेपर लीक व नकल माफियाओं का अड्डा बन गया है। खट्टर सरकार ने एचटेट परीक्षा, क्लर्क परीक्षा, एक्साईज़ इंस्पैक्टरी परीक्षा, एचसीएस ज्यूडिशियल परीक्षा, कंडक्टर परीक्षा, पटवारी परीक्षा, नायब तहसीलदार परीक्षा व आईटीआई इंस्पैक्टर परीक्षा सहित अनेकों परीक्षाओं के पेपर लीक हुए, युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ हुआ, पर किसी को आज तक सजा नहीं मिली। इसी प्रकार आईटीआई इंस्ट्रक्टर परीक्षा में पेपर माफिया पकड़ा गया व चंडीगढ़ में एफआईआर दर्ज हुई। पर इन सभी मामलों में न किसी की जिम्मेदारी निश्चित हुई, न ही पेपर बेचने वाले माफिया के संरक्षकों को पकड़ा गया और न ही मुख्यमंत्री ने कोई जवाब दिया। 

हमारी मांग है कि :- 

1. नॉन एचसीएस कैडर से आईएएस पद प्रमोशन प्रक्रिया घोटाले की निष्पक्ष न्यायिक जांच हो और दोषियों को सजा दी जाए।

2. हरियाणा स्टॉफ सिलेक्शन कमीशन व हरियाणा पब्लिक सर्विस कमीशन तथा सभी विभागों में जो नौकरियां विज्ञापित की गई हैं या फिर जिनके परीक्षा परिणाम व इंटरव्यू लंबित हैं, सभी का नतीजा एक महीने में निकालकर नियुक्तियां दी जांए।

3. हरियाणा सरकार नौकरियों पर श्वेत पत्र जारी कर यह बताएं कि विभागवाईज़ कितने कर्मचारियों की भर्ती पिछले छह वर्ष में हुई, कितनी भर्तियां लंबित हैं, इसके अलावा विभागवाईज़ ब्यौरा दिया जाए कि कितने लाख पद रिक्त पड़े हैं व अगले कितने दिनों में भाजपा जजपा सरकार उन पदों को भरकर युवाओं को रोजगार देगी।

4. सभी पेपरलीक मामलों की समयबद्ध रूप से जाँच हो, सजा मिले तथा यह सामने आए कि खर्ची और पर्ची का धंधा करने वाले नकल व पेपर लीक माफिया के तार सरकार में किससे जुड़े हैं।

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