लोकतंत्र सुरक्षा पार्टी के उम्मीदवार रहे तरविंदर सैनी (माईकल ) का कहना है कि गत दिनों से नगर निगम गुरुग्राम  भारी बारिश से उत्पन्न जलभराव की समस्या से जूझने के लिए उपाय खोज उनपर योजनाएं बनाने के लिए चर्चाएं करने में व्यस्त है  जिससे प्रतीत होता है कि नगर निगम समय रहते अपने दायित्वों की पूर्ति नहीं कर पाया और अब उसकी चेतना जागृत हो रही है , शहरवासियों ने पहली बार देखा है कि सितंबर माह में बरसात निकल जाने के बाद उपाय खोजे जा रहे हैं , दिवाली पर हौली के गीत गाए जा रहे हैं ।

ईसे नगर निगम की स्वीकार्यता भी मानी जा सकता है और स्पस्ट तौर पर दिखाई भी देता है कि वर्षो से चली आ रही यह समस्या जस की तस बनी हुई है और इससे उभरने की दिशा में उठाए गए कदम ना-काफी रहे जब्कि लाख दावे किए जा रहे थे स्थानीय विधायक , मेयर साहिबा और नगर निगम कमिश्नर द्वारा  लेकिन स्तिथियों में कोई सुधार नहीं हुआ – जलनिकासी के कोई भी प्रबंध नहीं किए जाने से और गैरजिम्मेदाराना रवैये के चलते  बड़े पैमाने पर जलभराव हुआ  यूँ कहें कि पूरा शहर जलमग्न हो गया हाइवे, अंडरपास से लेकर सेक्टर और कॉलोनियों में नावें चलाने के हालात पैदा हो गए ।

अब इनकी चेतना जागी है मगर उसका अब क्या लाभ  , मौसम विभाग के अनुसार भी 15 सितंबर के बाद से  वर्षाकाल ही समाप्त हो जाता है अर्थात  जो कार्य मई जून माह तक पूरे हो जाने चाहिए थे वो विषय ही अब जाकर सितंबर महीने में तो चर्चा के लिए रखा जा रहा है – तो क्या यह आगामी वर्ष के लिए योजना तैयार की जा रही है और यदि हाँ तो पहले के वर्षो में क्या करते रहे निगम अधिकारी  ?

ईस समस्या पर नजर रखने वाले जनप्रतिनिधियों ने भी कहा था कि जरूरी कदम उठाने के लिए दिशानिर्देश दिए जा चुके हैं तो फिर अब ईन मीटिंग्स का क्या लाभ ।कोरोनाकाल में अब इतना समय ईन कार्यो को देखना क्या समय की बर्बादी नहीं कहा जाएगा ? 

एक तरफ  मक्खी ,मच्छर , मलेरिया , वायरल बुखार , डेंगू मच्छरों की भरमार है तो दूसरी ओर कोरोना संक्रमितों का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है – ऐसे समय दवा के छिड़काव करने व फॉगिंग करके लोगों को बीमारियों के आतंक से बचाने की पहल की जानी चाहिए  मगर निगम अभी योजनाएँ बनाने में लगा है कि अगले वर्ष जलभराव न हो उसके लिए – जो अच्छी बात भी हो सकती है  मगर जैसे इसबार सारे दावे फेल हो गए थे  तो इसकी क्या जवाबदेही होगी कि पुनः वैसा ही दृश्य देखने को नहीं मिलेगा गुरुग्रामवासियों को ?

अपने वातानुकूलित कार्यालयों में बैठकर केवल चर्चाओं से नहीं बल्कि सफल योजनाएं बना उन्हें अमली- जामा पहनाने से  धरातल पर कुछ कर दिखाने से समस्याओं का निदान संभव है  भारत सरकार व  हरियाणा सरकार लिखी गाड़ियों में घूम रॉब दिखाने से नहीं  क्योंकि उनका लोग सम्मान करते हैं बारिश , डेंगू , मलेरिया के मच्छर नहीं  इसलिए लोगों के टैक्सरूपी धन का बेजा इस्तेमाल ना करें   बड़े ही मेहनत से कमाता है आमजन उसे  इसलिए लोगों को भृमित करना बंद करें ।

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