‘लोकतंत्र बचाओ’ से पहले जनता के सवालों का जवाब दें अमित शाह : संजय दत्त और राव नरेंद्र सिंह

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चुनावी पारदर्शिता, कानून-व्यवस्था, महिला पहलवानों और किसानों के मुद्दों पर कांग्रेस ने मांगी जवाबदेही

मुख्यमंत्री की विदेश यात्राओं से मिले निवेश और ठोस परिणामों का ब्योरा सार्वजनिक करने की मांग

चंडीगढ़, 4 नवंबर 2026। हरियाणा कांग्रेस ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के प्रस्तावित हरियाणा दौरे से पहले चुनावी पारदर्शिता, संवैधानिक संस्थाओं की जवाबदेही, कानून-व्यवस्था और किसानों की समस्याओं को लेकर सवाल उठाए हैं। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के हरियाणा प्रभारी संजय दत्त और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह ने संयुक्त वक्तव्य में कहा कि गृह मंत्री को ‘लोकतंत्र बचाने’ की बात करने से पहले प्रदेश की जनता के अनुत्तरित सवालों का स्पष्ट और संतोषजनक जवाब देना चाहिए।

कांग्रेस नेताओं के अनुसार, अमित शाह 5 नवंबर को करनाल में भाजपा के ‘लोकतंत्र बचाओ अराजकता हटाओ’ मार्च का नेतृत्व करेंगे और अंबाला में जनसभा को संबोधित करेंगे। दोनों नेताओं ने सवाल किया कि चुनावों की निष्पक्षता और संवैधानिक संस्थाओं की जवाबदेही पर प्रश्न उठाना अराजकता कैसे हो सकता है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की रक्षा पारदर्शिता, संस्थाओं की स्वतंत्रता और जनता के जनादेश के सम्मान से होती है।

कथित चुनावी अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच की मांग

संजय दत्त और राव नरेंद्र सिंह ने कहा कि वर्ष 2024 के हरियाणा विधानसभा चुनाव को लेकर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा उठाए गए सवालों का बिंदुवार जवाब दिया जाना चाहिए। उन्होंने राहुल गांधी के आरोपों का उल्लेख करते हुए कहा कि संदिग्ध मतदाता प्रविष्टियों, तस्वीरों में समानता, मतदाता अभिलेखों में विसंगतियों और नाम काटे जाने से संबंधित शिकायतों को केवल राजनीतिक आरोप बताकर खारिज करना उचित नहीं है।

दोनों नेताओं ने कथित चुनावी अनियमितताओं की निष्पक्ष, स्वतंत्र और पारदर्शी जांच की मांग की। उन्होंने कहा कि प्रत्येक वास्तविक मतदाता को मतदान का अवसर मिलने और प्रत्येक मत की सही गणना होने के प्रति जनता का विश्वास सुनिश्चित करना संबंधित संस्थाओं की जिम्मेदारी है।

चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति और कानूनी संरक्षण पर सवाल

कांग्रेस नेताओं ने वर्ष 2023 के कानून के तहत मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए गठित चयन समिति की संरचना पर भी सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित अंतरिम व्यवस्था में शामिल भारत के मुख्य न्यायाधीश के स्थान पर प्रधानमंत्री द्वारा नामित केंद्रीय मंत्री को समिति में क्यों रखा गया।

उन्होंने कहा कि तीन सदस्यीय समिति में सरकार के दो प्रतिनिधियों की मौजूदगी को लेकर उठ रही आशंकाओं का केंद्र सरकार को जवाब देना चाहिए।

दोनों नेताओं ने चुनाव आयुक्तों को आधिकारिक दायित्वों से जुड़े कार्यों के संबंध में दिए गए कानूनी संरक्षण पर भी स्पष्टीकरण मांगा। उन्होंने सवाल किया कि इस व्यवस्था के साथ संवैधानिक पदाधिकारियों की जवाबदेही कैसे सुनिश्चित की जाएगी।

अपराध रोकने के ठोस उपाय बताए सरकार

प्रदेश की कानून-व्यवस्था पर चिंता जताते हुए कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध अपराध, हत्या, अपहरण, फिरौती तथा आपराधिक गिरोहों के संघर्ष से नागरिकों में असुरक्षा बढ़ रही है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को अपराध रोकने की रणनीति, पुलिस की प्राथमिकताओं, जांच की गुणवत्ता और दोषसिद्धि की स्थिति पर स्पष्ट जानकारी देनी चाहिए। केंद्रीय गृह मंत्री से उन्होंने पूछा कि हरियाणा में नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भाजपा सरकार ने कौन से ठोस और मापनीय सुधार किए हैं।

महिला पहलवानों के साथ व्यवहार पर मांगा जवाब

संयुक्त वक्तव्य में महिला पहलवानों के आंदोलन का उल्लेख करते हुए दोनों नेताओं ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का मान बढ़ाने वाली खिलाड़ियों की शिकायतों को संवेदनशीलता और निष्पक्षता से सुना जाना चाहिए था।

उन्होंने भारतीय कुश्ती महासंघ के तत्कालीन अध्यक्ष के खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोपों को लेकर हुए आंदोलन और 28 मई, 2023 की पुलिस कार्रवाई का मुद्दा उठाया। कांग्रेस नेताओं ने सवाल किया कि न्याय की मांग कर रही पहलवानों को पुलिस कार्रवाई का सामना क्यों करना पड़ा।

उन्होंने आरोप लगाया कि महिला सुरक्षा संबंधी भाजपा के दावों और प्रदर्शनकारी खिलाड़ियों के प्रति उसके व्यवहार में विरोधाभास रहा। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों का संघर्ष महिलाओं की गरिमा, शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार और प्रभावशाली व्यक्तियों की जवाबदेही से जुड़ा था।

फसल खरीद, भुगतान और मुआवजे पर घेरा

किसानों के मुद्दों पर कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि प्रदेश के अन्नदाता उचित मूल्य, समय पर फसल खरीद और भुगतान, खाद-बीज की उपलब्धता तथा फसल खराब होने पर पर्याप्त मुआवजे के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी की मांग भी दोहराई।

वर्ष 2020-21 के किसान आंदोलन का उल्लेख करते हुए उन्होंने दिल्ली की सीमाओं पर लगाए गए अवरोधों और आंदोलनकारी किसानों के प्रति कुछ भाजपा नेताओं की टिप्पणियों पर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि किसानों को अपनी मांगों के लिए बार-बार सड़कों पर उतरने की नौबत क्यों आ रही है और उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान कब होगा।

मुख्यमंत्री की यात्राओं के परिणाम सार्वजनिक हों

संजय दत्त और राव नरेंद्र सिंह ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की प्रदेश से बाहर राजनीतिक व्यस्तताओं और विदेश यात्राओं को लेकर भी सवाल किए। उन्होंने वक्तव्य में उल्लिखित अक्टूबर की स्वीडन यात्रा से प्राप्त निवेश और औद्योगिक साझेदारियों का पूरा ब्योरा सार्वजनिक करने की मांग की।

दोनों नेताओं ने कहा कि जनता को यह जानने का अधिकार है कि इन यात्राओं से प्रदेश को क्या ठोस लाभ मिला और लंबित जनसमस्याओं के समाधान के लिए क्या व्यवस्था की गई।

संयुक्त वक्तव्य के अंत में कांग्रेस नेताओं ने कहा, “लोकतंत्र सवालों के जवाब देने से मजबूत होता है, सवाल पूछने वालों को अराजक बताने से नहीं।” उन्होंने कहा कि कोई राजनीतिक मार्च या नारा जनता के प्रति जवाबदेही का विकल्प नहीं हो सकता।

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Author: Bharat Sarathi

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