बिजली वितरण लाइसेंस के मामले में डीएचबीवीएन और यूएचबीवीएन ने एचईआरसी में संयुक्त पुनर्विचार याचिका दायर की

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इलेवन पावर को गुरुग्राम एवं नूंह जिलों में वितरण एवं विद्युत आपूर्ति लाइसेंस देने के आदेश पर पुनर्विचार की मांग

गुरुग्राम, 4 नवंबर 2026। दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (डीएचबीवीएन) एवं उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम लिमिटेड (यूएचबीवीएन) ने इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड (ईपीपीएल) को गुरुग्राम एवं नूंह राजस्व जिलों में बिजली वितरण एवं विद्युत आपूर्ति का लाइसेंस प्रदान किए जाने के संबंध में हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग (एचईआरसी) के आदेश के विरुद्ध संयुक्त रूप से पुनर्विचार याचिका दायर की है।

दोनों बिजली वितरण निगमों द्वारा यह याचिका 3 नवंबर 2026 को हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग के समक्ष दायर की गई। याचिका में आयोग द्वारा याचिका संख्या 30/2026 में 19 अक्टूबर 2026 को पारित आदेश पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया गया है। उक्त आदेश के तहत इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड को गुरुग्राम एवं नूंह राजस्व जिलों के लिए वितरण एवं विद्युत आपूर्ति लाइसेंस संख्या डीआरएस- 3 ऑफ 2026 प्रदान किया गया था।

पुनर्विचार याचिका विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा 94(1)(एफ), सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के आदेश XLVII नियम 1 तथा एचईआरसी (कार्य संचालन) विनियम, 2019 के विनियम 57 एवं 65 से 70 के अंतर्गत दायर की गई है।

याचिका में आयोग के 19 अक्टूबर के आदेश में अभिलेख से स्पष्ट होने वाली त्रुटियों एवं महत्वपूर्ण पहलुओं पर समुचित विचार किए जाने की आवश्यकता उठाई गई है। इसमें प्रमुख रूप से प्रस्तावित परियोजना के लिए आवश्यक पूंजी निवेश के स्वतंत्र आंकलन के बजाय इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड द्वारा प्रस्तुत अनुमानों को आधार बनाए जाने का मुद्दा शामिल है।

इसके अतिरिक्त, लागू लाइसेंसिंग नियमों के तहत निर्धारित न्यूनतम आपूर्ति क्षेत्र की आवश्यकता, लाइसेंस आवेदक की वित्तीय क्षमता, शेयरों के वास्तविक लाभकारी स्वामित्व एवं उन पर विद्यमान भार से संबंधित पहलुओं पर भी पुनर्विचार की मांग की गई है।

याचिका में प्रस्तावित कंसोर्टियम भागीदारों की तकनीकी एवं परिचालन क्षमता, उनके पूर्व अनुभव, कार्यों की खरीद एवं निष्पादन संबंधी व्यवस्थाओं तथा आवश्यक तकनीकी कर्मचारियों की उपलब्धता जैसे महत्वपूर्ण बिंदुओं को भी उठाया गया है।

दोनों निगमों ने आयोग से अनुरोध किया है कि इन सभी महत्वपूर्ण कानूनी, वित्तीय, तकनीकी एवं परिचालन पहलुओं तथा याचिका में इंगित अभिलेखीय त्रुटियों पर समुचित विचार करते हुए 19 अक्टूबर 2026 के आदेश की पुनर्समीक्षा की जाए।

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Author: Bharat Sarathi

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